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प्रवीण सूद बने रहेंगे सीबीआई निदेशक, मिला एक साल का एक्सटेंशन

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केंद्र सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक प्रवीण सूद के कार्यकाल को एक बार फिर बढ़ाने का फैसला किया है। यह उनके कार्यकाल में दूसरा सेवा विस्तार है।

इससे पहले मंगलवार को अगले सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के लिए पीएमओ में बैठक हुई थी। जिसमें मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शामिल हुए थे।

केंद्र सरकार ने बुधवार को सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल फिर से एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया।

सूद ने 25 मई 2023 को दो वर्ष की अवधि के लिए सीबीआई निदेशक का पदभार संभाला था। इससे पहले मई 2025 में भी उनको एक साल के सेवा विस्तार दिया गया था, अब वह इस पद पर मई 2027 तक बने रहेंगे।

सरकार की ओर से जारी बयान में मुताबिक, उनके कार्यकाल को बढ़ाने का निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई चयन समिति की बैठक में लिया गया। इस समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी शामिल थे। चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर नियुक्तियों की मंत्रिमंडलीय समिति (एसीसी) ने एक वर्ष की अवधि के लिए सूद के कार्यकाल के विस्तार को मंजूरी दी।

बैठक के बाद राहुल गांधी ने सीबीआई निदेशक चयन प्रक्रिया को लेकर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने इस प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण बताते हुए असहमति नोट दर्ज कराया। राहुल गांधी ने कहा कि वह ऐसी चयन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनना चाहते, जिसमें निष्पक्षता पर सवाल उठते हों। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें…

प्रवीन सूद 1986 बैच के कर्नाटक कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी हैं। उन्हें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का निदेशक नियुक्त किए जाने से पहले कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के रूप में कार्यरत थे।

सूद का जन्म 1964 में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में हुआ था। उन्होंने 22 वर्ष की आयु में भारतीय पुलिस सेवा ज्वाइन की थी। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है। इसके अलावा उन्होंने भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), बेंगलुरु और न्यूयॉर्क स्थित मैक्सवेल स्कूल ऑफ गवर्नेंस, सिरैक्यूज़ यूनिवर्सिटी से स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है।

सूद ने कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच की निगरानी की। तकनीक-प्रेमी सूद कर्नाटक में न्यायपालिका के साथ मिलकर सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स) और आईसीजेएस (इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम) को मजबूत करने की दिशा में भी कार्य कर चुके हैं।

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