नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी केन्द्र सरकार के खड़े नजर आ रहे हैं। यही नहीं, ओवैसी सरकार के हर फैसलों का पुरजोर तरीके से समर्थन करते हुए पाकिस्तान पर तीखे बयानों की बौछार भी कर रहे हैं। हालांकि विपक्ष उन्हें भाजपा की बी टीम भी बताता है। विपक्ष के इन आरोपों पर अब ओवैसी भड़क गए हैं और करारा जवाब देते हुए कहा है कि यह सब बकवास है। इस तरह के आरोप लगाने वाले जोकरों को हमारे सामने बैठाइए।
एक इंटरव्यू के दौरान ओवैसी ने कहा कि उन पर आरोप लगाने और उन्हें बीजेपी की बी-टीम कहने की कोशिश विपक्ष की उनकी पार्टी के प्रति नफरत के अलावा और कुछ नहीं है, क्योंकि यह पार्टी मुख्य रूप से मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने कहा कि बीजेपी लगातार चुनाव जीत रही है क्योंकि विपक्ष फेल साबित हुआ है और भाजपा ने हिंदू वोटों को एकजुट कर लिया है। उन्होंने इस बात को खारिज कर दिया कि वह मोदी विरोधी वोटों में सेंध लगाते हैं। बीजेपी ने हिंदू वोट को एकजुट किया। ओवैसी ने भाजपा की बी टीम होने के आरोपों पर कहा कि ये सब बकवास है, कभी इन तमाम जोकरों को मेरे सामने बैठाइए, डेटा पर बात करते हैं, क्योंकि ये लोग झूठे हैं।
भाजपा इसलिए जीत रही चुनाव
ओवैसी ने कहा कि अगर मैं 2024 के संसदीय चुनावों में हैदराबाद, औरंगाबाद, किशनगंज और कुछ अन्य सीटों पर चुनाव लड़ता हूं और बीजेपी को 240 सीटें मिलती हैं तो क्या मैं जिम्मेदार हूं? उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता में आ रही है, क्योंकि विपक्ष विफल है। भाजपा चुनाव जीत रही है, क्योंकि इसने लगभग 50 फीसदी हिंदू वोटों को अपने पक्ष में कर लिया है। पांचवीं बार लोकसभा सांसद चुने गए ओवैसी ने विपक्षी दलों पर मुस्लिम वोटों को हल्के में लेने और उनकी वास्तविक चिंताओं पर ध्यान न देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब समाज के हर वर्ग में राजनीतिक नेतृत्व की झलक मिलती है और यह आपको स्वीकार्य है, लेकिन आप नहीं चाहते कि मुसलमानों में राजनीतिक आवाज, राजनीतिक नेतृत्व की झलक मिले।
भारत के सवाल पर सेना के साथ खड़े होंगे
यह पूछे जाने पर कि क्या उनका इशारा कांग्रेस की ओर था, उन्होंने कहा कि उनका इशारा बसपा, सपा और बीजेपी सहित सभी विपक्षी दलों की ओर था। ओवैसी ने कहा कि यादव नेता होंगे, मुसलमान भिखारी होंगे, ऊंची जाति के लोग नेता होंगे, मुसलमान भिखारी होंगे। यह कैसे ठीक है। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि भारत के संस्थापकों ने देश को एक सहभागी लोकतंत्र के रूप में देखा था, तो अब मुसलमानों की भागीदारी कहां है? उन्होंने बताया कि लगभग 15 फीसदी आबादी के साथ देश में सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समूह होने के बावजूद, मुसलमानों की विधानसभाओं और संसद में सिर्फ 4 फीसदी भागीदारी है।
मुसलमान सिर्फ वोट बैंक नहीं
जब उनसे पूछा गया कि ऐसा क्यों है, तो उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि राजनीतिक दल मुसलमानों को चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं देते और फिर लोग मुसलमानों को वोट नहीं देते। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत इतने बड़े समुदाय को हाशिए पर और कमजोर रखकर 2047 तक ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल नहीं कर सकता। बता दें कि कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों ने हैदराबाद के अपने गढ़ से बाहर एआईएमआईएम पार्टी को बढ़ाने के ओवैसी की कोशिशों की खिल्ली उड़ाई है और कहा है कि वह वोटों का एक बड़ा हिस्सा, जिनमें से अधिकतर मुस्लिम हैं, काटकर बीजेपी को फायदा पहुंचा रहे हैं। आॅपरेशन सिंदूर के बाद भारत की तरफ से पाकिस्तान की पोल खोलने के लिए सांसदों और मंत्रियों के जो 7 ग्रुप 33 देशों का दौरा करेंगे, उनमें से एक ग्रुप में ओवैसी भी शामिल हैं।