भोपाल। अब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कुलपति भी कुलगुरु के नाम से जाने जाएंगे। यह जानकारी मप्र के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को कैबिनेट बैठक से पहले मंत्रियों को संबोधित करते हुए दी। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले साल के मप्र सरकार के फैसले से प्रेरणा लेते जेएनयू ने यह बड़ा फैसला लिया है।
सीएम डॉ. यादव ने कह कि मध्यप्रदेश की तर्ज पर, जेएनयू के कुलपति अब ‘कुलगुरु’ के नाम से जाने जाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि जेएनयू ने इस बदलाव को औपचारिक रूप से लागू किया है या कोई आधिकारिक प्रशासनिक आदेश जारी किया गया है। यादव ने कहा कि यह निर्णय पिछले साल मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए एक फैसले से प्रेरित है, जिसमें कुलपति पद का नाम बदलकर कुलगुरु कर दिया गया था। उन्होंने कहा था कि यह बदलाव भारतीय संस्कृति और गुरु परंपरा के अनुरूप है और कुलपति शब्द अपने अटपटे अर्थ के कारण महिला पदाधिकारियों के लिए समस्या पैदा कर सकता है।
बहनों के खाते 12 को आएंगे 1500
मुख्यमंत्री ने बुधवार को दोहराया कि लाडली बहना योजना की महिला लाभार्थियों को रक्षाबंधन पर नियमित मासिक वित्तीय सहायता के अलावा 250 रुपये की विशेष सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह राशि 12 जुलाई को सीधे लाभार्थियों के खातों में भेज दी जाएगी। यादव ने दस जुलाई को गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में, सभी स्कूलों और कॉलेजों में दो दिवसीय गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाने की घोषणा की। इस समारोह में जिले के मंत्री, जनप्रतिनिधि, गणमान्य व्यक्ति और संत शामिल होंगे।
बीआरटीएस हटाने का निर्णय सुखद
उन्होंने बताया कि इस अवसर पर भोपाल में संदीपनी विद्यालय (कमला नेहरू स्कूल) का उद्घाटन किया जाएगा। यादव ने दावा किया कि बीआरटीएस (बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) को हटाने से सड़क दुर्घटनाओं में 51 प्रतिशत और मृत्यु दर में 70 प्रतिशत की कमी आई है, जो उनके अनुसार मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जनहित में लिए गए निर्णयों का सुखद परिणाम है। सरकार ने जनवरी 2024 में बीआरटीएस को हटाने का निर्णय लिया था।