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जनहित में सामने आई चूक, मुख्यमंत्री ने लगाई तीन जिलों के कलेक्टर्स की क्लास

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मध्यप्रदेश में बारिश-बाढ़ में राहत कार्यों से जुड़े कामों में ज्यादातर जिलों की संवेदनशीलता सामने आई है, लेकिन रीवा, सतना और झाबुआ जैसे कुछ जिलों में जनता के हितों का ध्यान रखने में कुछ जगह चूक रहे हैं। सतना जिले ने राहत संबंधी काम तो किए, लेकिन प्रभावितों तक खबर देर से पहुंची।

रीवा जिले में बाढ़ से एक सड़क कट गई। इससे कई लोगों की जान सांसत में आई, तब भी आसपास के गांव वालों को समय पर जानकारी नहीं मिली। वे उसी सड़क से गुजरने के लिए निकल पड़े। झाबुआ जिले में कुछ अफसर एक कदम आगे निकल गए। जिन 10 नागरिकों की मौत पानी से डूबने के कारण हुई, उन्हें बाढ़ में बहना बता दिया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन तीनों जिलों के कलेक्टरों को फटकार लगाई। कहा कि आप ठीक से जिमेदारी निभाएं। किसी भी हालत में लोगों को परेशानी न हो, इसका ध्यान रखें। सरकार इस बात के लिए गंभीर है कि बारिश व बाढ़ के दौरान जानमाल का नुकसान न हो। हर स्तर पर बेहतर समन्वय बनाएं। जरूरत पड़ती है तो प्रदेश स्तर के अफसरों से संपर्क में रहें। सीएम मंगलवार को वीसी के जरिए बारिश, बाढ़ व राहत कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। कलेक्टरों से कहा, राहत कार्यों और शिविरों के प्रबंधन में सामाजिक संस्थाओं को सहभागी बनाएं। संभावित बाढ़ वाली नदियों के जलस्तर पर निगरानी रखें।

अफसरों ने बताया कि आगामी माहों में वर्षा अनुमान देखते हुए एनडीआरएफ की 2 टीमों को भोपाल में, एक-एक टीम जबलपुर, ग्वालियर और धार में तैनात की गई हैं। एसडीईआरएफ की टीमें भी तैनात हैं। जिलों को मोटर बोट, लाइफ जैकेट, लड लाइट, प्राथमिक उपचार किट और अन्य आपदा उपकरण उपलब्ध करा दिए गए हैं। सीएम ने कहा , आगामी त्योहारों में उचित व्यवस्था और आवश्यक सावधानियां बरतें। बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, मुय सचिव अनुराग जैन, डीजीपी कैलाश मकवाना और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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