नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज शनिवार को नई दिल्ली के भारत मंडप में ग्रामीण भारत महोत्सव 2025 का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट के चेयरपर्सन शाजी केवी भी मौजूद थे। पीएम ने शाजी केवी का अभिनंदन भी किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ‘साल 2025 की शुरूआत में ग्रामीण भारत महोत्सव का भव्य आयोजन भारत की विकास यात्रा को दर्शा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे गांव जितने समृद्ध होंगे, विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में उनकी भूमिका उतनी ही बड़ी होगी। जिसे किसी ने नहीं पूछा, उसे मोदी ने पूजा। छोटी जगह पर पला-बढ़ा, इसलिए गांवों की समस्याएं जानता हूं।
पीएम ने कहा कि कि ‘आज गांवों के लाखों घरों को पीने का साफ पानी मिल रहा है। लोगों को डेढ़ लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। आज डिजिटल तकनीक की मदद से बेहतरीन डॉक्टर और अस्पताल भी गांवों से कनेक्ट हो रहे हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी है कि आर्थिक नीतियां गांव के हर वर्ग को ध्यान में रखकर बनाई जाएं। बीते 10 वर्षों में हमारी सरकार ने ये काम किया है। दो-तीन दिन पहले ही कैबिनेट ने पीएम फसल योजना को एक साल और बढ़ाने को मंजूरी दी है।
मैं हर पल ग्रामीण भारत के लिए कर रहा हूं काम
पीएम मोदी ने कहा, ‘जिन्हें किसी ने नहीं पूछा, उन्हें मोदी ने पूजा है। 2014 से मैं लगातार हर पल ग्रामीण भारत की सेवा के लिए काम कर रहा हूं। गांवों में लोगों को सम्मानजनक जीवन देना मेरी सरकार की प्राथमिकता है। हमारा दृष्टिकोण ग्रामीण भारत में लोगों को सशक्त बनाना, उन्हें आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना, प्रवासन को रोकना और उनके जीवन को आसान बनाना ह। इसे हासिल करने के लिए हमने हर गांव में बुनियादी सुविधाओं की गारंटी का अभियान चलाया है।
बीते दस वर्षों में कृषि ऋण साढ़े तीन गुना बढ़ा
प्रधानमंत्री ने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि के जरिए देश को किसानों को तीन लाख करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है। बीते 10 वर्षों में कृषि ऋण साढ़े तीन गुना बढ़ गए हैं। अब पशुपालकों और मछली पालकों को भी किसान क्रेडिट कार्ड दिए जा रहे हैं। हमने बीते 10 वर्षों में फसलों पर दी जाने वाली को बढ़ाया है। हमने स्वामित्व योजना जैसे अभियान चलाए हैं, जिनके जरिए गांव के लोगों को संपत्ति के दस्तावेज दिए जा रहे हैं। आज गांव के युवाओं को मुद्रा योजना, स्टार्टएप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया जैसी योजनाओं के जरिए मदद की जा रही है। किसानों को फसलों का सही दाम मिले, इसके लिए साल 2021 में अलग मंत्रालय का गठन किया गया।
छोटी जगह पर पला-बढ़ा, इसलिए गांवों की समस्याएं जानता हूं: पीएम
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मैंने अपना बचपन एक छोटे शहर में बिताया, जिसने मुझे ग्रामीण क्षेत्रों में सामना की जाने वाली चुनौतियों का प्रत्यक्ष अनुभव दिया। साथ ही, इससे मुझे गांवों में मौजूद विशाल संभावनाओं को समझने में भी मदद मिली। अपनी कड़ी मेहनत के बावजूद, ग्रामीण अक्सर सीमित संसाधनों के कारण अवसरों तक पहुंचने के लिए संघर्ष करते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में डीएपी का दाम बढ़ रहा है, आसमान छू रहा है, लेकिन हमने निर्णय किया कि हम किसान के सिर पर बोझ नहीं आने देंगे और सब्सिडी बढ़ाकर डीएपी का दाम स्थिर रखा है। हमारी सरकार की नीयत, नीति और निर्णय ग्रामीण भारत को नई ऊर्जा से भर रहे हैं। गांव के हर वर्ग के लिए विशेष नीतियां बनाई हैं। दो-तीन दिन पहले ही कैबिनेट ने ‘पीएम फसल बीमा योजना’ को एक वर्ष अधिक तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है।
ग्रामीण इलाकों में बढ़ी क्रय शक्ति
पीएम मोदी ने कहा कि ‘हाल ही में एक अहम सर्वे हुआ है, जिसमें पता चला कि साल 2011 की तुलना में अब ग्रामीणों की क्रय शक्ति करीब तीन गुना बढ़ गई है। अब गांव के लोग पहले की तुलना में ज्यादा खर्च कर रहे हैं। आजादी के बाद देश के ग्रामीण खाने पर 50 प्रतिशत आमदनी खर्च कर रहे थे। यह पहली बार है कि यह दर 50 फीसदी तक घट गई है।’ पीएम ने कहा कि ‘पूर्व की सरकारों ने दलितों, जनजातियों और पिछड़े वर्ग के लोगों की परेशानियों पर ध्यान नहीं दिया, जिसके चलते गांवों से पलायन हुआ और गरीबी बढ़ी। गांवों और शहरों में लगातार अंतर बढ़ रहा है। ‘जिन्हें किसी ने नहीं पूछा, उन्हें मोदी ने पूजा है’। जिन इलाकों को विकास से वंचित रखा गया, अब वहां समान अधिकार मिल रहे हैं।
4 जनवरी से 9 जनवरी तक चलेगा महोत्सव
ग्रामीण भारत महोत्सव का आयोजन 4 जनवरी से लेकर 9 जनवरी तक होगा और इसकी थीम ‘विकसित भारत 2047 के लिए एक लचीले ग्रामीण भारत का निर्माण’ रखी गई है। इस महोत्सव के दौरान ग्रामीण भारत की उद्यमशीलता की भावना और सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाया जाएगा। इस महोत्सव में विभिन्न चचार्ओं और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनके जरिए ग्रामीण बुनियादी ढांचे को बढ़ाने, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के निर्माण और ग्रामीण समुदाय में नवाचार को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही इसका उद्देश्य सरकार टिकाऊ कृषि प्रथाओं को अपनाने के साथ ही उद्यमिता के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाना है।