इंदौर। झाबुआ के पेटलावद के जंगल में लावारिश मिले 2 माह के मासूम के जीवन में फिर खुशियां लौट आई हैं। उसे अमेरिका के दंपत्ति ने गोद लिया है और वह इंदौर पहुंच भी गए हैं। यही नहीं मासूम अपने नए माता-पिता के साथ बुधवार को संजीवनी सेवा संगम संस्था अपना जन्म दिन भी मनाया। अब पासपोर्ट की प्रक्रिया पूरे होने के बाद दंपत्ति बच्चे को लेकर अमेरिका रवाना होगा। विदेशी दंपती द्वारा गोद लिए गए बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र बनवा लिया गया है। बच्चे के पासपोर्ट के लिए प्रोसेस चल रही है। तब तक विदेशी दंपती इंदौर में ही रहेंगे। बच्चे का पासपोर्ट बनते ही वे उसे लेकर अमेरिका रवाना हो जाएंगे।
दरअसल, क्लेफ्ट पैलेट (कटे तालू) और क्लेफ्ट लिप (कटे होंठ) की समस्या के साथ जन्मे दो माह के बच्चे को उसके माता-पिता ने जंगल में छोड़ दिया था। इसके बाद मासूम को झाबुआ के सरकारी अस्पताल लाया गया। जहां से उसे इंदौर के संजीवनी सेवा संगम संस्था भेजा गया। यहां उसकी तीन सर्जरी हुई। स्वस्थ्य हो जाने के बाद बच्चे को इंदौर के संजीवनी सेवा संगम संस्था भेजा गया। यहां उसका इलाज हुआ और नया जीवन मिला। घटना के 6 महीने बाद अब एक अमेरिकी दंपत्ति इस बच्चे को अपनाकर उसे परिवार और नया जीवन देने जा रहा है।
दत्तक ग्रहण की कानूनी प्रक्रिया
संजीवनी सेवा संगम के सामाजिक कार्यकर्ता राहुल कोली ने बताया कि बच्चे के जैविक माता-पिता की तलाश के कई प्रयास किए गए, लेकिन वे नहीं मिले। इसके बाद, कानूनी प्रक्रिया के तहत बच्चे को दत्तक ग्रहण के लिए विधिमुक्त घोषित किया गया और उसकी संपूर्ण जानकारी केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण पोर्टल पर अपलोड की गई।
पोर्टल के माध्यम से बच्चे को गोद लेने की दी मंजूरी
संस्था सुपरिटेंडेंट आशा सिंह ने बताया कि अमेरिका के दत्तक दंपत्ति ने सीएआरए पोर्टल के माध्यम से बच्चे को गोद लेने की मंजूरी दी। इस प्रक्रिया में अधिकृत विदेशी दत्तक ग्रहण एजेंसी ने उन्हें आवश्यक दस्तावेज तैयार करने में सहायता की। सीएआरए द्वारा अनुमोदन प्रदान करने के बाद, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, रामनिवास बुधौलिया (महिला एवं बाल विकास विभाग अधिकारी) ने इस केस से संबंधित दस्तावेज तैयार कर अपर कलेक्टर रोशन राय के समक्ष प्रस्तुत किए। अपर कलेक्टर ने बच्चे का अंतरदेशीय दत्तक ग्रहण आदेश जारी किया गया। इसके बाद संस्था ने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र और पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया शुरू की। बुधवार को बच्चे के नए माता-पिता उसका जन्मदिन मनाने के बाद उसे अमेरिका लेकर रवाना होंगे।
तलाश के बाद भी नहीं मिले जैविक माता-पिता
बच्चे को छह माह पहले पेटलावद से इंदौर लाया गया था। संस्था ने लंबे समय तक उसके माता-पिता की तलाश कि लेकिन पता नहीं लग सका। इसके बाद बाल कल्याण समिति, झाबुआ ने उसे संजीवन संस्था को देखरेख के लिए सौंपा। संस्था में आठ माताओं (महिला केयर टेकर्स) ने उसकी मां की तरह देखभाल की। स्नेह, प्यार और अपनापन दिया। उन्होंने न केवल उसकी दैनिक देखभाल की, बल्कि उसकी सेहत और विकास का भी पूरा ध्यान रखा।
44 सालों से सेवा में जुटी है संस्था
संजीवनी सेवा संगम, 1981 से संचालित है। संस्था अनाथ और बेसहारा बच्चों के पुनर्वास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। संस्था बच्चों को रहने, शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास की सुविधाएं प्रदान करती है। इसी के तहत इस बच्चे को भी बाल कल्याण समिति, झाबुआ से यहां भेजा गया। संस्था की अध्यक्ष प्रफुल्ला सिंह झाबुआ के नेतृत्व में संस्था निरंतर बच्चों के कल्याण और पुनर्वास के लिए काम कर रही है।