ईरान से भारत आने वाले कच्चे तेल की खेप को चीन मोड़ने की खबरों पर सरकार ने स्पष्ट जवाब दिया है। सरकार ने इन रिपोर्ट्स को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है और कहा है कि तेल आयात को लेकर कोई भुगतान समस्या नहीं है।
सरकार ने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि भुगतान में दिक्कत के कारण ईरानी तेल की खेप भारत से चीन भेज दी गई। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह जानकारी सही नहीं है। मंत्रालय ने बताया कि भारत 40 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल आयात करता है और तेल कंपनियों को अपनी जरूरत के अनुसार सप्लायर चुनने की पूरी छूट होती है।
रूट बदलने पर सफाई
रिपोर्ट्स में कहा गया था कि ‘पिंग शुन’ नाम का जहाज गुजरात के वाडिनार की ओर आ रहा था, लेकिन बाद में उसने अपना रुख बदलकर चीन के डोंगयिंग की तरफ कर लिया। इस पर सरकार ने कहा कि तेल के कारोबार में जहाजों का रास्ता बदलना सामान्य प्रक्रिया है। कई बार समुद्र में ही व्यापारिक और संचालन संबंधी कारणों से गंतव्य बदला जाता है।
सरकार ने यह भी कहा कि मध्य पूर्व में तनाव के बावजूद भारत ने आने वाले महीनों के लिए कच्चे तेल की जरूरत पहले ही पूरी कर ली है। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि देश में तेल की आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा और सभी जरूरी इंतजाम किए जा चुके हैं।
LPG सप्लाई पर भी स्पष्टीकरण
एलपीजी को लेकर भी चल रही खबरों को सरकार ने गलत बताया। सरकार ने कहा कि ‘सी बर्ड’ नाम का जहाज 2 अप्रैल को मंगलुरु पहुंच चुका है। इस जहाज में करीब 44 हजार मीट्रिक टन ईरानी एलपीजी था, जिसे फिलहाल उतारा जा रहा है।



