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सम्मान पाने दायरे में सीमित रहें संवैधानिक संस्थाएं, धनखड़ बोले- टकराव से फलता-फूलता नहीं लोकतंत्र

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लखनऊ। देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ गुरुवार को यूपी के दौरे पर पहुंचे। धनखड़ ने यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘चुनौतियां मुझे पसंद हैं’ के विमोचन करने लखनऊ पहुंचे। जानकीपुरम स्थित एकेटीयू में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप राष्ट्रपति ने संवैधानिक संस्थाओं को फिर कड़ी नसीहत दी। साथ ही यूपी के सीएम योगी आदित्यना और राज्यपाल की भी खूब सराहना की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जगदीप धनखड़ ने कहा कि देश की सभी संवैधानिक संस्थाओं का एक-दूसरे का सम्मान करना बाध्यकारी कर्तव्य है और यह सम्मान तभी होता है जब सभी संस्थान अपने-अपने दायरे में सीमित रहते हैं। उन्होंने कहा कि संस्थाओं के टकराव से लोकतंत्र फलता-फूलता नहीं है जब संस्थाओं के बीच टकराव होता है। संविधान इस बात की मांग करता है कि समन्वय हो, सहभागिता हो, विचार विमर्श हो, संवाद और वाद-विवाद हो। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना व पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र समेत कैबिनेट मंत्री मौजूद रहे।

चुनौतियों का मैं स्वयं भुक्तभोगी हूं
उपराष्ट्रपति ने हाल ही में संसद में पारित वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर उच्चतम न्यायालय के रुख की तरफ इशारा करते हुए कहा, कई ऐसी चुनौतियां हैंजिसकी हम चर्चा नहीं कर सकते। जो चुनौती अपनों से मिलती है जिसका तार्किक आधार नहीं है, जिसका राष्ट्र विकास से संबंध नहीं है और जो राजकाज से जुड़ी हुई है। इन चुनौतियों का मैं स्वयं भुक्तभोगी हूं।उन्होंने कहा, राष्ट्रपति जैसे गरिमापूर्ण पद पर टिप्पणी करना मेरे हिसाब से चिंतन का विषय है और मैंने इस बारे में अपनी चिंता व्यक्त की है। सभी संस्थाओं की अपनी-अपनी भूमिका है। एक संस्था को दूसरी संस्था की भूमिका अदा नहीं करनी चाहिए। हमें संविधान का उसकी मूल भावना में सम्मान करना चाहिये।

सभी संस्थओं को रहना चाहिए अपने दायरे में
धनखड़ ने कहा कि जिस तरीके से विधायिका विधिक फैसले नहीं ले सकती, यह न्यायपालिका का काम है, ठीक उसी तरीके से सभी संस्थाओं को अपने दायरे में सीमित रहना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा, मैं न्यायपालिका का सबसे ज्यादा सम्मान करता हूं। मैंने चार दशक से ज्यादा समय तक वकालत की है। मैं जानता हूं कि न्यायपालिका में प्रतिभाशाली लोग हैं। न्यायपालिका का बहुत बड़ा महत्व है। हमारी प्रजातांत्रिक व्यवस्था कितनी मजबूत है, यह न्यायपालिका की स्थिति से परिभाषित होती है।

अपनों से मिली चुनौती सबसे खतरनाक होती है
धनखड़ ने पहलगाम की घटना को भी एक चुनौती बताया। कहा कि पीएम के नेतृत्व में हम सुरक्षित हैं। हम एक देश के रूप में उनके साथ खड़े हैं। राष्ट्रवाद हमारा धर्म है। इससे दूर नहीं रह सकते। यही कारण है कि दुनिया आज हमारी तरफ देख रही है। चुनौतियों को अवसर में बदलने की हमारे पास क्षमता है। सबसे खतरनाक चुनौती वह है जो अपनों से मिलती है। किंतु हम उसकी चर्चा भी नहीं कर सकते हैं।

राज्यपाल इतनी सरल नहीं हैं… जितनी दिखती हैं
इस मौके पर उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने यूपी की राज्यपाल की सराहना करते हुए कहा कि आनंदी बेन पटेल नाम ही काफी है। जिस प्रदेश में वह शिक्षक रहीं, मंत्री रहीं और मुख्यमंत्री रहीं। आज उस प्रदेश का स्थापना दिवस है। आज श्रमिक दिवस भी है। इस दिन को उनके जीवन पर आधारित पुस्तक का विमोचन रखा गया। यह कितना सोच समझकर किया गया होगा। आनंदी बेन इतनी सरल नहीं हैं, जितनी दिखती हैं।

भारत के सबसे ज्यादा एक्सप्रेस-वे यूपी में हैं
उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश है। सीएम योगी को युवा कहा जा सकता है। आज युवा की परिभाषा समझ नहीं आती है। यूपी आठ साल बेमिसाल के लायक है। यहां महाकुंभ सबसे बड़ा आयोजन हुआ। इसमें 60 करोड़ से ज्यादा लोगों का आना और सफलतम आयोजन होना, सदियों तक याद रहेगा। सीएम उत्तम प्रदेश के सारथी हैं। आपका भी आकलन आसान नहीं है। आठ साल में यूपी को बिना टैक्स के ही 12 लाख करोड़ से 30 लाख करोड़ तक ले गए। यह हर अर्थशास्त्री के लिए अचंभा है। प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है। भारत के सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे यहां है। आपके यहां छह शहरों में मेट्रो है।

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