भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस ने मंगलवार को अशोकनगर में न्याय सत्याग्रह किया। प्रदेशभर से नेता और कार्यकर्ता यहां पीसीसी चीफ जीतू पटवारी पर दर्ज एफआईआर के विरोध में गिरफ्तारी देने पहुंचे। कांग्रेस के न्याय सत्याग्रह पर भाजपा ने पलटवार किया है। मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस और जीतू पटवारी का रवैया चोरी और सीनाजोरी करने वाला है। जीतू पटवारी अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने और अपनी छवि चमकाने के लिए बिना तथ्यों के सनसनीखेज खबर फैलाने के दोषी हैं।
मंत्री सारंग ने कहा कि कांग्रेस ने जिस प्रकार से फूहड़तापूर्ण प्रदर्शन की कोशिश की थी, वह पूरी तरह से फेल हो चुका है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विधायक साहब सिंह गुर्जर ने अशोकनगर में कांग्रेस के कथित प्रदर्शन में शामिल नहीं होने वाले कांग्रेस नेताओं के लिए अनर्गल व आपत्तिजनक हिजड़ा शब्द का उपयोग किया है। क्या यह शब्द कांग्रेस नेता कमलनाथ और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरूण यादव के लिए है, जो इस कथित प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए हैं। यह प्रदर्शन कांग्रेस की गुटबाजी का प्रबल उदाहरण प्रस्तुत करता है। पहले चोरी और ऊपर से सीना जोरी, स्वयं गलती करो और उसे छिपाने के लिए कानून और संविधान को धता बताना, स्वयं को कानून और संविधान से ऊपर मानने का गुरूर कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं के डीएनए में रहा है।
सारंग ने कहा कि जिस मंच पर दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी जैसे नेता बैठे हों। उनकी उपस्थिति में साहब सिंह गुर्जर ने मंच ने प्रदर्शन में शामिल नहीं होने वाले नेताओं को हिजड़ा कहा, जो कांग्रेस के नेताओं का सरासर अपमान व असंवैधानिक है। कांग्रेस विधायक का यह बयान थर्ड जेंडर और महिलाओं का भी अपमान है। भाजपा सभ्य समाज में इस तरह के बयान की घोर निंदा करती है। कांग्रेस विधायक के इस तरह आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग करना यह स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है कि गुटों और गिरोह में बंटी कांग्रेस पार्टी समाज में अराजकता फैला रही है।
जीतू पटवारी ने प्रशासन को धमकाया, युवाओं का किया अपमान
मंत्री सारंग ने कहा कि जीतू पटवारी ने मीडिया की सुर्खियों में आने के लिए अशोकनगर की घटना को गलत ढंग से प्रस्तुत किया। उनका यह कृत्य निश्चित रूप से गैरकानूनी था। उन्होंने जिस प्रकार सोशल मीडिया पर जिला कलेक्टर से स्पीकर आॅन करके बात की, जिस तरह से दादागिरी और चमकाने की भाषा का प्रयोग किया उसके माध्यम से जीतू पटवारी संभवत: यह बताने की कोशिश कर रहे थे कि अब मैं बहुत बड़ा नेता हो गया हूं। हद तो तब हो गई जब उन युवाओं को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के लिए यह झूठी बात कही गई कि उन्हें मल खिलाया गया है। इस तरह की घटनाएं अगर होती भी हैं, तो पीड़ित की पहचान उजागर नहीं की जाती, क्योंकि इससे उसके साथ-साथ उसका पूरा परिवार प्रभावित होता है। जीतू पटवारी ने इस तरह की झूठी खबर फैलाकर न सिर्फ कानून अपने हाथ में लिया, बल्कि प्रदेश का सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने की भी कोशिश की।