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निहितार्थ

कर्नाटक में कांग्रेस का ‘मैंने ऐसा तो नहीं कहा था’ वाला नाटक

गुजरे दौर की एक फिल्म याद आ गयी। नायक रूमानियत से भरा गीत गा रहा है, लेकिन हर अंतरे पर नायिका उसके सारे किए-धरे...

इसे सियासत न मानें शिवराज की

समय है कि इस सबमें राजनीतिक निहितार्थ तलाशने की बजाय हम इसके अभ्यस्त हो जाएं। यदि मुख्यमंत्री निवास में एक पीड़ित आदिवासी के पांव...

तमाशाई बन जाएंगे खुद तमाशा !

विषय अलग-अलग हैं, लेकिन उनमें गजब का साम्य है। फ़िल्मी गीत 'गजर ने किया है इशारा…' काफी लोकप्रिय रहा। गजर यानी घड़ी का वह...

चाय वाला बनाम चाय का खोमचा

फ़िलहाल यह मामला चाय का खोमचा लगाने वाले उस शख्स जैसा लग रहा है, जिसने अपने दोस्त से दावा किया कि यदि उसे अंबानी...

कर्नाटक से मप्र के बीच तक कांग्रेस की ये उलटबासी

एक लघुकथा याद आ गई। सुबह के समय मुसाफिरों की वह बस एक मंदिर की तरफ जा रही थी। उसमें बुजुर्गों की खासी भीड़...

स्वागत योग्य है भ्रष्टाचार की दुर्गति के लिए शिवराज की यह गति 

उच्च शिक्षा विभाग के ओएसडी संजय कुमार जैन का ऑडियो वायरल होने के बाद से ही इस बात का इंतजार था कि मामले में...

कमल के लिए खाद नहीं बन सकता कर्नाटक का कीचड़

रास्ते में कीचड़ से सामना हो जाना भले ही अच्छा न लगने वाला मामला हो। काम तो उससे भी लिया जा सकता है। कीचड़...

कुलीनों के कुनबे में ऐसी कलह

दीपक जोशी के साथ कांग्रेस कार्यालय होकर आई स्वर्गीय कैलाश जोशी की तस्वीर का तो पता नहीं लेकिन जोशी जी की आत्मा को हुए...

मूल की तरफ लौटे बिना उद्धार नहीं भाजपा का…

मध्यप्रदेश में भाजपा के लिए यह चिंतित होने वाली स्थिति है। पार्टी के पास यह कहने के लिए मुंह नहीं है कि मामला चौंकाने...

देश को कलंक से बचाने के लिए सबसे बड़ी अदालत को नमन

मुंशी प्रेमचंद की अमर कृति 'गोदान' का एक प्रसंग याद आ गया। होरी के गांव में पुलिस आई। 'अपने तरीके' से काम करके चलती...

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