CATEGORY
इस तराजू के नीचे कहां की जमीन है मजबूत?
पीना नहीं रोक सकते तो न रोकिये जीना भी
गंदे नाले में बदल गई है पत्रकारिता की पवित्र नदी
समझिये कि आप क्यों बन गए ‘दैनिक बकवासकर’
बीरबलों की अपनी-अपनी खिचड़ी
पसीने की जगह आंसू क्यों नहीं बहाते दिग्विजय ?
जितना खाया मीठा था, जो हाथ न आया खट्टा है
कमलनाथ को लेकर यह शिगूफेबाजी
जो बोया, वही काट रहे दिग्विजय
ये आक्रांता नहीं आक्रांत वाला मामला है