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जनता की जमीन पर भाजपा का कब्जा, जीतू ने सरकार पर बोला हमला, जानें क्या है मामला

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भोपाल। मोहन कैबिनेट में मंगलवार को मऊगंज और पांढुर्णा जैसे नवगठित जिलों में सरकारी जमीन को भाजपा कार्यालय बनाने की मंजूरी दे दी है। कैबिनेट के इस फैसले पर सियासत शुरू हो गई है। पीसीसी जीतू पटवारी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। साथ ही कहा है कि क्या अब भाजपा सरकार ने जनता की संपत्ति को अपना निजी स्थायी पता मान लिया है?

जीतू पटवारी ने बुधवार को कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने लोकतंत्र की सभी मयार्दाओं को तोड़ते हुए जनता की जमीन को भाजपा के स्थायी दफ्तरों में बदलना शुरू कर दिया है। जीतू ने तंज कसते हुए कहा कि मोहन सरकार ने लोकतंत्र को जागीरतंत्र बना दिया है। उन्होंने कहा कि गुना में डेढ़ बीघा सरकारी जमीन पर भाजपा दफ्तर बनाने के लिए प्रशासन ने आदिवासी परिवारों के घर तोड़ दिए, जो वहां 50-60 सालों से रह रहे थे। उनकी पुश्तैनी रिहायश और यादों को कुछ ही घंटों में मिट्टी में मिला दिया गया।

उजागर हुआ भाजपा का चाल-चरित्र और चेहरा
वहीं नीमच में 20 हजार वर्ग फीट जमीन भाजपा ने कब्जा में ले ली, जिसका बाजार मूल्य 20 करोड़ रुपए से अधिक है। इतना ही नहीं, जमीन से जुड़े एक भी पैसे का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। पटवारी ने कहा कि यह भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा उजागर करने वाला उदाहरण है। जनता के टैक्स और सरकारी जमीन का उपयोग भाजपा के दफ्तर और गेस्ट हाउस बनाने के लिए किया जा रहा है, जबकि इन्हीं जमीनों पर स्कूल, अस्पताल, रैन-बसेरे और गरीबों के मकान बन सकते थे।

जीतू का सवाल

1. क्या मध्य प्रदेश में अब सरकारी जमीनों की खुली लूट की छूट भाजपा को है?

2. क्या जनता की जमीन को भाजपा का निजी साम्राज्य बना दिया गया है?

3. क्या कर्ज की 100: लूट और 50: कमीशन भी अब भाजपा को कम पड़ रहा है?

लोकतंत्र की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही सरकार
पटवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी जमीन के दुरुपयोग पर पहले भी गंभीर टिप्पणी की थी, लेकिन मोहन सरकार खुलेआम संविधान और लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा रही है। यह साफ है कि भाजपा सत्ता का दुरुपयोग कर रही है और पूरे प्रदेश में सरकारी दादागिरी फैला रही है।

जीतू ने की यह मांग

भाजपा को आवंटित की गई सारी सरकारी जमीनें वापस ली जाएं।

इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए।

ष्यदि सरकार ने यह जमीनी लूट नहीं रोकी, तो कांग्रेस जन आंदोलन के लिए मजबूर होगी।

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