24.2 C
Bhopal

एपीएस युनिवर्सिटी को दोहरा झटका: 2 करोड़ 59 लाख रुपए जमा करने के बाद भी हाथ से फिसली जमीन

प्रमुख खबरे

रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय परिसर के एमबीए भवन के पास अनंतपुर में शिक्षा सहित अन्य विकास कार्य के लिए आरक्षित भूमि पर 13 लोगों द्वारा कब्जा किया गया था, जिसे हटाने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2007 से हाथ-पांव मारे जाते रहे। वहीं बमुश्किल अवार्ड पर समझौता बना। 2 करोड़ 59 लाख से ज्यादा की राशि भी जमा की गई लेकिन बात नहीं बन सकी और विश्वविद्यालय की काफी जमीन हाथ से फिसल गई है। इस मामले में कब्जाधारियों को हाईकोर्ट ने राहत दे दी है।

अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय परिसर के अंतर्गत ग्राम अनंतपुर स्थित खसरा क्रमांक 984, 983, 982/9, 982/5, 982/2 व 982/8 रकबा 0.624 हेक्टेयर, 0.405 हेक्टेयर, 0.012 हेक्टेयर, 0.022 हेक्टेयर, 0.022 हेक्टेयर एवं 0.015 हेक्टेयर भूमि के आधिपत्य को लेकर विश्वविद्यालय द्वारा लगातार कलेक्टर से पत्राचार किया जाता रहा। जिसमें इस बात का भी उल्लेख किया जाता था कि कलेक्टर कार्यालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 30.11.2023 के उपरांत भी आज दिनांक तक उपरोक्त भूमियों का आधिपत्य नहीं सौंपा जा रहा है। जबकि उपरोक्त जमीनों की मुआवजा राशि का भुगतान विश्वविद्यालय द्वारा 17 नवंबर 2017 को ही पूर्णरूपेण किया जा चुका है। उपरोक्त जमीनों का आधिपत्य नहीं मिलने के कारण विश्वविद्यालय के प्रस्तावित कार्य एवं प्रगति प्रभावित हो रही है।

समय-समय पर पत्राचार
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय द्वारा भूमि को कब्जाधारियों से मुक्त कराकर विश्वविद्यालय को वापस दिलाए जाने को लेकर लगातार पत्राचार किया जाता रहा है। सूत्र बताते हैं कि पत्राचार के दौरान तहसीलदार कार्यालय से दल गठित कर जांच करने व कार्रवाई करने की टीप लगती रही लेकिन कब्जे को बेदखल नहीं किया जा सका। यही वजह है कि विश्वविद्यालय की बेशकीमती जमीन हाथ से फिसल गई।

हाईकोर्ट ने फैसले में पूछा कलेक्टर को कहां से मिला अधिकार
हाईकोर्ट के विद्वान जज विवेक अग्रवाल द्वारा अपने फैसले में कड़ा रुख अख्तियार किया है। जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा कि रीवा कलेक्टर को दूसरा अवार्ड पारित करने का अधिकार कैसे प्राप्त हुआ तथा उन्हें यह अधिकार कहां से मिला। विद्वान जज विवेक अग्रवाल ने अपने फैसले में लिखा है कि यह स्पष्ट नहीं है कि कलेक्टर को शपथ पत्र के पैरा 10 में वर्णित 21 मार्च 2017 को दूसरा अवार्ड पारित करने का अधिकार कैसे प्राप्त हुआ तथा उन्हें यह अधिकार कहां से मिला। कलेक्टर रीवा द्वारा आज से दस दिन के भीतर राज्य के महाधिवक्ता द्वारा विधिवत सत्यापित एक और शपथ पत्र प्रस्तुत करे। वहीं रजिस्ट्रार को भी अधिनियम 2013 की धारा 24 के संदर्भ में शपथ पत्र प्रस्तुत करने को कहा गया है।

लगभग पौने सात एकड़ की है भूमि
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षा तथा अन्य विकास को लेकर भवन आदि निर्माण के लिए भूमि को आरक्षित रखा गया था। सूत्र बताते हैं कि इसका रकबा 2.511 हेक्टेयर यानी लगभग पौने सात एकड़ है। जिसकी बाजारी कीमत वर्तमान परिस्थितियों में लगभग 50 करोड़ के करीब है। दुर्भाग्य है कि छात्र हित एवं शिक्षा को लेकर आरक्षित भूमि को खुर्द-बुर्द किया जा रहा है और विश्वविद्यालय द्वारा इसे अपने आधिपत्य में करने के लिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया जा सका।

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

ताज़ा खबरे