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राजस्थान के PACL चिटफंड घोटाले मे एक्शन: पूर्व मंत्री खाचरियावास के ठिकानों-घर पर ED की दबिश, तफ्तीश की जा रही भमिकाओं की

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जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित पीएसीएल चिटफंड घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा एक्शन लिया है। ईडी की टीम ने 2,850 करोड़ रुपये के पीएसीएल घोटाले में कांग्रेस के पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के ठिकानों और घर पर छापेमारी की है। इस मामले में ईडी कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास की भूमिका की जांच में जुटी है। मिली जानकारी के मुताबिक ईडी खाचरियावास की इस घोटाले में उनकी भूमिकाओं की तफ्तीश कर रही है। उनपर आरोप है कि उनका इस स्कीम से जुड़ाव रहा है और उन्हें इससे लाभ मिला है। बता दें कि पीएसीएल चिटफंड घोटाले ने देशभर में बड़ी संख्या में निवेशकों को प्रभावित किया था।

ईडी के एक्शन पर पूर्व मंत्री ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि ईडी की टीम बिना किसी नोटिस दिए सीधे सिविल लाइंस स्थित उनके घर पहुंच गई है। उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि मैं ईडी की टीम की छापेमारी का जवाब दूंगा। मुझे इस तरह की कार्रवाई की कोई डर नहीं है, लेकिन बीजेपी को ईडी का इस्तेमाल करके राजनीति नहीं करनी चाहिए।

देशभर में दर्ज किए गए थे कई मामले
पीएसीएल चिटफंड घोटाले मामले में केस सबसे पहले 2011 में जयपुर के चौमू थाने में दर्ज किया गया था। इसके बाद से कंपनी पर देशभर में कई मामले दर्ज हुए। पीएसीएल के इस घोटाले में देशभर से 5.85 करोड़ लोगों ने 49,100 करोड़ रुपये का निवेश किया था। अकेले राजस्थान में करीब 28 लाख निवेशकों से 2850 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। कंपनी पर आरोप है कि उसने रियल एस्टेट में निवेश के नाम पर करोड़ों लोगों से निवेश करवाया और फिर उनकी रकम वापस नहीं लौटाई। 2014 में नियामक संस्था सेबी ने कंपनी की स्कीम्स को अवैध घोषित कर दिया और इसके बाद कंपनी का कारोबार बंद करवा दिया गया। 2016 में, सुप्रीम कोर्ट ने सीजेआई (रिटायर्ड) आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया और कंपनी की संपत्तियों की नीलामी कर निवेशकों को उनके पैसे लौटाने का आदेश दिया।

पीएसीएल की संपत्तियां 1.86 लाख करोड़ की!
सेबी के आकलन के मुताबिक, पीएसीएल की संपत्तियां 1.86 लाख करोड़ की हैं, जो निवेश की गई राशि से कहीं अधिक हैं। अब ईडी की जांच में उन लोगों और अधिकारियों की पहचान की जा रही है जिन्होंने इस घोटाले से डायरेक्ट या इनडायरेक्ट रूप से लाभ उठाया। खासतौर से, राजस्थान में बड़ी राजनीतिक और आर्थिक हस्तियों की भूमिका की जांच चल रही है।

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