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संस्कारधानी से धर्म परिवर्तन का बड़ा मामला आया सामने, हिन्दूवादी संगठनों ने खोला मोर्चा, पुलिस ने किया इनकार

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जबलपुर। मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर से धर्म परिवर्तन का बड़ा मामला सामने आया है। यहां पर 100 आदिवासियों को बस में भरकर धर्म परिवर्तन के लिए ले जाया जा रहा था। यह आरोप हिन्दूवादी संगठनों ने लगाया है। इतना ही नहीं, विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बस को रोक कर मांझी थाने पहुंच गए। हालांकि, पुलिस ने इससे इनकार कर दिया है। वहीं बस में सवार लोगों का कहना है कि वे चर्च में पूजा करने के लिए आए थे। उनका धर्म परिवर्तन नहीं हुआ है। उनकी कई पीढ़ियां क्रिश्चन हैं।

विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि बस में मंडला के महाराजपुर से लाए आदिवासी लोग मिले है, जिन्हें धर्म परिवर्तन करवाने के लिए चोरी-छिपे यहां लाया गया था। बस को भंवरताल पार्क पर रोका गया था, हालांकि हिंदूवादी संगठनों के पहुंचने पर बस का चालक फरार हो गया, जिसे पीछा करते हुए रांझी में पकड़ा गया। पुलिस ने सभी लोगों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने बस यात्रियों से मिलने आए दो लोगों के साथ थाने में ही मारपीट कर दी।

हिन्दू संगठनों का आरोप: आदिवासियों पर धर्मांतरण का बना रहे दबाव
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह लोग आदिवासी लोगों का मन डायवर्ट करते हुए उन्हें धर्मांतरण के लिए दबाव बना रहे थे। इस दौरान हिंदू संगठन के कार्यकतार्ओं की पुलिस से भी जमकर बहस हुई। विश्व हिंदू परिषद के प्रांत प्रमुख संजय तिवारी ने कहा, हमें सूचना मिली थी कि लोग धर्म परिवर्तन के लिए आ रहे हैं। जैसे ही हमारे कार्यकर्ताओं के पहुंचने की सूचना मिली, उन्होंने सभी को बस में बैठाकर वहां से रवाना कर दिया। हम सनातनी हिंदू हैं। अगर आप अपना काम छोड़कर आ रहे हैं तो कुछ तो लालच रहा होगा।

रांझी टीआई ने कही यह बात
वहीं थाना रांझी टीआई मानस द्विवेदी ने बताया, विश्व हिंदू परिषद एक बस लेकर यहां पहुंची। बस में मौजूद लोग भ्रमण पर निकले थे। ये लोग ईस्टर त्योहार से पहले अलग-अलग चर्चों के भ्रमण और तीर्थ यात्रा के उद्देश्य से रवाना हुए थे। उन्हें भंवरताल गार्डन के पास स्थित चर्च और रांझी स्थित चर्च का भ्रमण कर सदर होते हुए वापस जाना था।बातचीत में पता चला है कि वे यहां के रहने वाले नहीं हैं तो सभी को वेरिफाई कर पाना संभव नहीं है। अभी तक पूछताछ में ज्यादातर लोगों का पहले से ईसाई होने का रिकॉर्ड मिला है। मंडला थाना को भी इसमें शामिल कर जांच की जाएगी।

यात्री बोले- हम लोग अपनी मर्जी से आए
बस में सवार एक युवती ने बताया कि हम लोग तो बस से तीर्थ यात्रा पर आए थे और चर्च जा रहे थे। तभी कुछ अंकलों ने हमें रोका और बाद में पुलिस स्टेशन ले आए। वे कह रहे हैं कि हम लोगों को बहकाया जा रहा है। लेकिन हम अपनी मर्जी से यहां आए हैं। बस का किराया भी हमने ही दिया है। हमने 500-500 रुपए दिए हैं। हमें बस चर्च लेकर जा रही थी। हमने खुद तय किया था कि हम यहां आएंगे। इस मामले में विश्व हिंदु परिषद के सदस्य संजय तिवारी ने कहा कि अगर ये लोग क्रिश्चियन हैं, तो आईडी में भी यही दर्ज होना चाहिए। लेकिन आईडी में आदिवासी लिखा है। हमें सुबह 8:30 बजे सूचना मिली, जिसके बाद हमारे कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। वहां दो बसें थीं, जिनमें से एक बस निकल गई।

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