मध्य प्रदेश में नगरीय सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने एमपी लॉकर ऐप के जरिए शहरी प्रशासन को मोबाइल प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी शुरू कर दी है।
इस ऐप के माध्यम से अब नागरिक नगरीय सेवाओं से जुड़े 22 से अधिक दस्तावेज अपने मोबाइल पर सुरक्षित तरीके से देख सकेंगे, डाउनलोड कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर साझा भी कर पाएंगे।
अब मोबाइल बनेगा डिजिटल नगर निगम
एमपी लॉकर ऐप में संपत्ति कर, जल कर, भुगतान रसीद, लाइसेंस, प्रमाणपत्र और अन्य नगरीय दस्तावेज डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे। इससे लोगों को बार-बार नगर निगम और सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। शासन इसे मोबाइल आधारित शहरी प्रशासन की दिशा में बड़ा बदलाव मान रहा है।
क्रेडाई बोला- रियल एस्टेट क्षेत्र को मिलेगा फायदा
क्रेडाई भोपाल ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि डिजिटल दस्तावेज व्यवस्था से रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी। भवन अनुमति, संपत्ति रिकॉर्ड और कर संबंधी दस्तावेज ऑनलाइन सत्यापित होने लगेंगे तो बैंक प्रक्रिया, ग्राहक सेवा और परियोजनाओं की मंजूरी पहले से अधिक तेज और आसान हो जाएगी।
नगरीय सेवाओं को तकनीक आधारित बनाना जरूरी
क्रेडाई भोपाल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि तेजी से शहरीकरण वाले मध्य प्रदेश में अब नगरीय सेवाओं को तकनीक आधारित बनाना जरूरी हो गया है। क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने कहा कि एमपी लॉकर सिर्फ दस्तावेज रखने वाला ऐप नहीं, बल्कि भविष्य की डिजिटल शहरी व्यवस्था की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस प्लेटफॉर्म को ई-नगरपालिका, भवन अनुमति प्रणाली, भू-स्थानिक सूचना प्रणाली, संपत्ति रिकॉर्ड और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शहरी डैशबोर्ड से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि नागरिकों को एक ही मंच पर सभी सेवाएं मिल सकें।
दूसरे राज्यों से सीख, मध्य प्रदेश को बनाना होगा बड़ा डिजिटल मॉडल
क्रेडाई ने दूसरे राज्यों के उदाहरण भी दिए। गुजरात का ई-नगर पोर्टल वर्ष 2025-26 में 18 लाख से ज्यादा लेनदेन और 1031 करोड़ रुपए राजस्व तक पहुंच चुका है। केरल के ई-सेवनम पोर्टल पर 937 सेवाएं उपलब्ध हैं, जबकि तेलंगाना का मी-सेवा ऐप 270 से ज्यादा सेवाएं दे रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि एमपी लॉकर को केवल दस्तावेज रखने तक सीमित न रखकर, इसे प्रदेश के व्यापक शहरी सेवा मंच के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।



