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वेतन, स्थायी नौकरी को लेकर मप्र के आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों का आंदोलन

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मध्यप्रदेश के आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों ने वेतन, स्थायी नौकरी और ठोस नीति की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है।

18 मई को सभी जिलों में प्रदर्शन और 25 मई को भोपाल में बड़ा शक्ति प्रदर्शन होगा। कर्मचारियों ने मांगें नहीं मानी जाने पर भूख हड़ताल की चेतावनी भी दी है।

मध्य प्रदेश में आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान कर दिया है।

कर्मचारियों का आरोप है कि प्रदेशभर में हजारों स्वास्थ्यकर्मी पिछले 5 से 6 महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन शासन स्तर पर अब तक कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई।

मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने चरणबद्ध प्रदेशव्यापी आंदोलन के दूसरे चरण में 18 मई को सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालयों पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।

इस दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी एकत्र होकर अपर मुख्य सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के नाम ज्ञापन सौंपेंगे।

स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी

संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी और इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह स्वास्थ्य प्रशासन की होगी। कर्मचारियों का कहना है कि भीषण गर्मी में सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है, ऐसे समय में यदि आउटसोर्स कर्मचारी हड़ताल पर गए तो व्यवस्थाएं चरमरा सकती हैं।

25 मई को भोपाल में बड़ा प्रदर्शन

संघ ने आंदोलन के तीसरे चरण में 25 मई को राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में विशाल धरना-प्रदर्शन की घोषणा की है। यहां आउटसोर्स कर्मचारी ठेका प्रथा खत्म करो, नौकरी सुरक्षित करो और न्यूनतम 26 हजार वेतन लागू करो जैसे नारों के साथ प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला को ज्ञापन सौंपा जाएगा। संघ ने साफ कहा है कि मांगों का निराकरण नहीं हुआ तो आगे भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

– रिक्त पदों पर आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों को स्थायी किया जाए

– वर्षों से सेवाएं दे रहे संविदा सपोर्ट स्टाफ को ठेका प्रथा से बाहर किया जाए

– उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाई जाए

– न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपए किया जाए

– लंबित एरियर का भुगतान तुरंत कराया जाए

– सीएल और मेडिकल अवकाश की सुविधा दी जाए

– तृतीय और चतुर्थ श्रेणी भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए

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