विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए) का कांग्रेस, समाजवादी पार्टी एवं वामदलों ने विरोध किया।
विपक्ष का कहना है कि एफसीआरए ईसाइयों, अल्पसंख्यकों और एनजीओ के खिलाफ है। जो एनजीओ भारत के लोगों के लिए अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें इस कानून के जरिए दंडित किया जा रहा है।
सरकार पर गुमराह करने का लगाया आरोप
विपक्षी दलों के भारी विरोध के चलते यह बिल लोकसभा में पेश नहीं किया जा सका। संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजीजू ने कहा कि विधेयक का उद्देश्य केवल राष्ट्रीय सुरक्षा है।
फिलहाल विधेयक टल गया है, लेकिन विवाद बरकरार है। स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि विपक्षी सांसद जिस विधेयक की बात कर रहे हैं, जब वह आएगा, तब विरोध कर सकते हैं।
आमने-सामने सरकार और विपक्ष
विदेशी चंदे से संबंधित विधेयक पर केंद्र सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। लोकसभा में बुधवार को भारी हंगामे और विरोध के कारण सरकार को फिलहाल इस विधेयक को पेश करने से पीछे हटना पड़ा।
सरकार इसे पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ रही है, जबकि विपक्ष इसे एनजीओ और नागरिक समाज पर सख्त नियंत्रण की कोशिश बता रहा है।
सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वाम दलों के सांसदों ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए) का जोरदार विरोध शुरू कर दिया। कई सांसद नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए।
इसके पहले संसद परिसर में भी विपक्ष ने बैनर लेकर प्रदर्शन किया। हंगामे के चलते कार्यवाही पांच मिनट में ही स्थगित करनी पड़ी।



