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राजधानी में बढ़े सड़क हादसे, 5 सालों में 900 लोगों ने जान गंवाई

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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सड़क हादसों से जुड़ी एक रिपोर्ट ने प्रशासन और जनता दोनों को चौंका दिया है. सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के समक्ष पेश की गई इस रिपोर्ट में बताया गया कि बीते 5 वर्षों में 900 से अधिक लोगों ने सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाई, जिनमें से 543 लोगों ने हेलमेट नहीं पहना था.

बीते 5 सालों में 900 से ज्यादा लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई है, जिनमें से करीब 70% यानी 543 लोगों ने हेलमेट नहीं पहना था. ये चौंकाने वाला डेटा सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के समक्ष पेश किया गया.

भोपाल में 16 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां सबसे अधिक गंभीर हादसे होते हैं. ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि नियम तोड़ने वालों पर लगातार कार्रवाई हो रही है, लेकिन लोगों में जागरूकता की भारी कमी है. हेलमेट न पहनना अब सिर्फ चालान का मामला नहीं, जानलेवा लापरवाही बन गया है. भोपाल में अजीबोगरीब रेलवे ओवर ब्रिज भी हादसों का बड़ा कारण बन रहे हैं. भोपाल में कई एजेंसियां अलग-अलग अपने-अपने निर्माण कर रही हैं और उनके बीच कोई कोऑर्डिनेशन दिखाई नहीं देता. एक एजेंसी सड़क बनाती है तो दूसरी उसी सड़क को उखाड़ देती है. भोपाल में करोड़ों की लागत से बना बीआरटीएस भी फ्लॉप हुआ और उसे बंद करना पड़ गया.

 पुलिस का दावा: ‘हेलमेट पहनना’ भी कई जिंदगियां बचा सकता था

रिपोर्ट के अनुसार, सड़क हादसों में करीब 70% मौतें ऐसे लोगों की हुई हैं जिन्होंने हेलमेट नहीं पहना था. ट्रैफिक पुलिस का दावा है कि वे लगातार हेलमेट और ट्रैफिक नियमों को लेकर अभियान चला रही है, लेकिन लोगों में लापरवाही अब भी बनी हुई है. यह आंकड़ा दर्शाता है कि सिर्फ एक छोटी सी एहतियात ‘हेलमेट पहनना’ भी कई जिंदगियां बचा सकता था. रिपोर्ट से ये सवाल भी उठते हैं कि क्या यह पूरी तरह से नागरिकों की लापरवाही है, या सिस्टम की खामियां भी इन हादसों की जिम्मेदार हैं? कई हादसों में खराब सड़क, रोशनी की कमी और ट्रैफिक पुलिस की गैरमौजूदगी भी अहम कारक रही है.

ब्लैक स्पॉट्स पर होती हैं ज्यादातर मौतें

शहर में 16 ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित किए गए हैं, जो हादसों के मुख्य केंद्र बन चुके हैं. कई जगहों पर सड़क डिजाइन की खामियां, लेफ्ट टर्न क्लियरेंस की कमी, और ट्रैफिक सिग्नल की अनदेखी इन मौतों के पीछे प्रमुख कारण माने जा रहे हैं. भोपाल देहात और शहर मिलाकर औसतन हर दिन दो लोगों की जान सड़क हादसों में जा रही है.

स्कूल, कॉलेज और सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता

भोपाल ट्रैफिक पुलिस के एडिशनल डीसीपी बसंत कौल ने बताया कि स्कूल, कॉलेज और सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने की कोशिश हो रही है, लेकिन जब तक नागरिक खुद जागरूक नहीं होंगे, हादसे नहीं रुकेंगे. भविष्य में प्रशासन ब्लैक स्पॉट्स को सुधारने, रोड सेफ्टी ऑडिट कराने और चालान की कार्रवाई को और तेज करने की योजना बना रहा है.

 

 

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