नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को रविवार को एक झटका लगा। दरअसल तकनीकी गड़बड़ी की वजह से इसरो का पीएसएलवी-सी61 रॉकेट का लॉन्च मिशन असफल हो गया है। लॉन्च के बाद तीसरे चरण के दौरान तकनीकी गड़बड़ी देखी गई, जिससे मिशन अधूरा रह गया। इस मिशन का उद्देश्य एडवांस अथ आब्जर्वेशन सैटेलाइट ईओएस-09 को सूर्य समकालिक ध्रुवीय कक्षा में स्थापित करना था, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के कारण सैटेलाइट अपनी तय कक्षा में नहीं पहुंच सका।
इसरो चीफ वी. नारायणन ने बताया कि सैटेलाइट के लॉन्च का पहला और दूसरा चरण सामान्य रहा लेकिन तीसरे चरण को पूरा नहीं किया जा सका और खामी की वजह से यह मिशन सफल नहीं रहा। उन्होंने कहा, कि तीसरे चरण के संचालन के दौरान हमने एक अवरोध देखा और मिशन को पूरा नहीं किया जा सका। अब हम इस डेटा का विश्लेषण करेंगे और फिर मिशन पर लौटेंगे। बता दें कि यह पीएसएलवी रॉकेट का 63वां और एक्सएल कॉन्फिगरेशन में 27वां मिशन था। शुरूआती दो चरणों में सब कुछ सामान्य था। लेकिन जब तीसरे चरण ने काम करना शुरू किया, तभी एक तकनीकी समस्या सामने आई।
ईओएस-09 को खासतौर से इसके लिए किया गया था डिजाइन
इस मिशन के तहत ईओएस-09 को पृथ्वी की सूर्य समकालिक कक्षा (एसएसपीओ) में स्थापित किया जाना था। यह सैटेलाइट एडर-04 का रिपीट संस्करण था और इसका उद्देश्य रिमोट सेंसिंग डेटा प्रदान करना था ताकि विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत उपयोगकर्ता समुदाय को सटीक और नियमित आंकड़े मिल सकें। ईओएस-09 सैटेलाइट को इस उद्देश्य से डिजाइन किया गया था कि यह देश की रिमोट सेंसिंग क्षमताओं को और मजबूत कर सके। ईओएस-09 को खासतौर पर एंटी टेररिस्ट आॅपरेशन, घुसपैठ या संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने के लिए डिजाइन किया गया था। इसरो की तकनीकी टीम अब इस समस्या की गहन जांच करेगी ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि लॉन्च के दौरान किस स्तर पर गड़बड़ी आई और भविष्य में उसे कैसे सुधारा जा सके।
पीएसएलवी रॉकेट के चरण कैसे काम करते हैं?
पीएसएलवी (पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) एक चार-चरणीय रॉकेट होता है:
पहला और तीसरा चरण – ठोस ईंधन से चलते हैं
दूसरा और चौथा चरण – तरल ईंधन से चलते हैं
तीसरा चरण सैटेलाइट को ऊपरी वायुमंडल में सही कक्षा की दिशा में ले जाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसी चरण में गड़बड़ी आई और सैटेलाइट तय कक्षा तक नहीं पहुंच पाया।