10वीं, 12वीं की परीक्षा में असफल होकर पढ़ाई छोड़ चुकी बेटियों और महिलाओं की शिक्षा फिर प्रारंभ कराने के लिए सरकार सरस्वती अभियान शुरू करने जा रही है। केंद्र सरकार की ‘बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ’ योजना के अंतर्गत यह अभियान चलाया जाएगा। इसमें पढ़ाई और परीक्षा शुल्क का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (आठ मार्च) के उपलक्ष्य में 10 मार्च को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यक्रम में इस अभियान की शुरुआत करेंगे। इसमें लाड़ली लक्ष्मी के अतिरिक्त अन्य बेटियां व महिलाएं भी शामिल हो सकती हैं, जो पढ़ना चाहती हैं। राज्य ओपन बोर्ड के माध्यम से इन्हें 10वीं और 12वीं की पढ़ाई और परीक्षा में बैठने का अवसर मिलेगा।
सरकार इस अभियान के माध्यम से बेटियों के स्कूल छोड़ने की दर (ड्राप आउट) को कम करने के प्रयास में है। बता दें कि हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने लाड़ली लक्ष्मी बेटियों में से 40 हजार से अधिक के कालेज तक नहीं पहुंचने के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। सरकार से भी इस संबंध में जवाब मांगा गया है। विधानसभा के बजट सत्र में भी कांग्रेस के कुछ विधायकों ने यह विषय उठाया था।
महिला एवं बाल विकास विभाग इसके लिए नोडल रहेगा। अभियान से बेटियों और महिलाओं को जोड़ने, उन्हें प्रोत्साहित करने का काम विभाग करेगा। शिक्षण का काम स्कूल शिक्षा विभाग करेगा। इसके माध्यम से सबसे बड़ा लक्ष्य यही है कि लाड़ली लक्ष्मी बेटियों में अधिकाधिक को कालेज तक पहुंचाया जाए।



