श्योपुर। मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में स्मैक का अवैध कारोबार जमकर फल-फूल रहा है। एक ओर जहां राजस्थान से आ रही स्मैक युवाओं की रगों में नशा बनकर दौड़ रही है तो वहीं कुछ बेरोजगार युवाओं के लिए नशे का यह अवैध कारोबार अच्छा खासा व्यवसाय बन गया है। आश्चर्य की बात तो यह है कि शहर के हर गली, नुक्कड़, चौराहों पर नशे का यह काला कारोबार सरेआम संचालित है। यह सब आम जनता को दिखाई भी दे रहा है, लेकिन पुलिस प्रशासन इससे बेखबर है।
स्मैक का नशा सिरिंज के माध्यम से करने वालों ने ऐसे ठिकाने बना रखे हैं जिनमें लोग आने जाने में भी डरते हैं। ऐसी जगह पर ये लोग सिरिंज के माध्यम से अपनी नसों में डालने का काम बैखोफ होकर कर रहे है। ऐसे ही स्थानों में सुबात कचहरी, बंजारा डेम, पुरानी कलेक्ट्रेट, आदि ऐसे स्थान हैं जहां पर नशे के लिए उपयोग की गई खाली सिरिंज और एविल इंजेक्शन की खाली सीसी ढेरों पड़ी मिल जाती हैं। ज्ञातव्य हो कि स्मैक का नशा सिरिंज के माध्यम से स्मैक को एविल इंजेक्शन में मिलाकर और गर्म करने के बाद नस में लगाकर किया जाता है।
कोटा बारां से आ रहा नशा, सबको याद पर पुलिस बेखबर
स्मैक का नशा श्योपुर में राजस्थान के कोटा और बारां जिले से सप्लाई हो रहा है। यहां से नशा बड़ौदा कस्बे में फैलाया जा रहा है। नशे के परिवहन में गरीब परिवारों की महिलाओं की मदद ली जा रही है। यह महिलाएं अपने अंतरवस्त्र में नशा छिपाकर कोटा से श्योपुर ला रही हैं। इसके लिए इन्हें अच्छी खासी रकम इनाम के रूप में मिलती है। कोटा से लाई गई स्मैक कई गुना भाव पर श्योपुर में नशेड़ियों को बेची जा रही है। जो लोग नशे का कारोबार कर रहे हैं इसकी खबर पुलिस को है, इसके बावजूद कार्रवाई करने से परहेज क्यों कर रही यह समझ से परे है।
नाम भी सौंपे नशा कारोबारियों के पर कार्रवाई दूसरों पर
नशे के कारोबार से आजिज आ चुके लोगों ने कई बार धरना प्रदर्शन किए एक बार तो सर्वसमाज, सर्व गांव और पूरे शहर के जिम्मेदार लोगों ने नशे के कारोबार को बंद करने के लिए जोरदार प्रदर्शन किया और एसपी को ज्ञापन भी सौंपा। इस ज्ञापन में आधा सैकड़ा से अधिक उन नशे के कारोबारियों के नाम थे जो शहर और गांवों में युवाओं को नशा बेचने का काम करते थे। पुलिस को नाम की सूची देकर समाजसेवी नशे के कारोबारियों के विरोधी तो हो गए लेकिन पुलिस ने किसी नशे के कारोबारी पर कार्रवाई करने के बजाय शराब ले जाते, गांजा पीते हुए लोगों पर कार्रवाई कर इति श्री कर ली जो आज भी जारी है।