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स्वच्छतम शहर इंदौर में दूषित पानी पीने से सात लोगों की मौत

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देश के स्वच्छतम शहर और वाटर प्लस (अपशिष्ट जल प्रबंधन) का तमगा प्राप्त कर चुके इंदौर में दूषित पानी पीने से एक-एककर सात लोगों की मौत हो गई। घटना भागीरथपुरा क्षेत्र की है। यहां बीते कई दिनों से रहवासी गंदा पानी सप्लाई होने की शिकायत कर रहे थे।

सोमवार को जब 100 से अधिक लोगों को उल्टी-दस्त होने पर अस्पताल तक जाना पड़ा तब जाकर मामले की गंभीरता पता चली। उल्टी- दस्त से मंगलवार तक सात लोगों की मौत हो चुकी है।

अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है कि क्षेत्र में 26 दिसंबर को उल्टी-दस्त से पहली मौत हुई थी, लेकिन जिम्मेदारों की नींद नहीं टूटी। सोमवार को अस्पताल पहुंचे करीब 100 में से 34 लोगों की स्थिति इतनी खराब थी कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

गौरतलब है कि भागीरथपुरा का बड़ा हिस्सा प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र इंदौर-एक में आता है। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने भागीरथपुरा क्षेत्र में सर्वे किया। पता चला कि अधिकतर घरों में उल्टी-दस्त के मरीज हैं। मंगलवार को ही नगर निगम की टीम ने दूषित पानी की वजह जानने के लिए क्षेत्र की जल वितरण लाइनों की जांच की।

जानकारी मिली है कि जिस मुख्य लाइन से पूरे भागीरथपुरा में पानी वितरित होता है, उसी के ऊपर सार्वजनिक शौचालय बना हुआ है। मुख्य लाइन फूटने की वजह से ड्रेनेज सीधे उसमें मिलकर रहवासियों के घरों तक पहुंच रहा था। इसके अलावा भी क्षेत्र में कई अन्य जगह पेयजल की वितरण लाइन में टूट-फूट मिली। इन टूटी-फूटी लाइनों में से ड्रेनेज पीने के पानी में मिलकर रहवासियों के घरों तक पहुंच रहा था।

फिलहाल पूरे भागीरथपुरा में नर्मदा नदी के पानी की सप्लाई बंद कर टैंकरों के माध्यम से जल वितरण की व्यवस्था की गई है। अब तक गोमती रावत, उर्मिला यादव, सीमा प्रजापत, उमा पप्पू कोरी, नंदलाल पाल, मंजूला दिगंबर और तारा रानी की मृत्यु उल्टी-दस्त से दर्ज की गई है। सोमवार शाम को मंत्री कैलाश विजवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव मरीजों का हाल लेने अस्पतालों में पहुंचे।

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