मध्यप्रदेश सरकार ने माननीयों के वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी की तैयारी पूरी कर ली है. मंत्रियों, विधायकों, पूर्व विधायकों और विधानसभा के प्रमुख पदाधिकारियों के वेतन में व्यापक वृद्धि पर अब अंतिम निर्णय की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
संसदीय कार्य विभाग ने गुरुवार को बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री मोहन यादव को भेज दिया है.
सरकार की योजना है कि आगामा 1 दिसंबर से शुरू हो रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इस संबंध में विधेयक पेश किया जाएगा.
राज्य में लगभग 9 साल बाद यह संसोधन होने जा रहा है. पड़ोसी राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ पहले ही अपने माननीयों के वेतन बढ़ा चुके हैं. इसी के बाद मध्यप्रदेश में भी यह प्रक्रिया तेज हुई.
इस साल बजट सत्र के दौरान विपक्ष के नेता उमंग सिंघार सहित कई विधायकों ने सदन में वेतन-भत्ते बढ़ाने की मांग उठाई थी. इस पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सुझाव दिया कि यदि सरकार चाहे तो वेतन वृद्धि पर विचार करने के लिए समिति बनाई जा सकती है. सीएम मोहन यादव ने इसे तुंरत स्वीकार किया.
इसके बाद 27 अक्टूबर को एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया, जिसमें डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, बीजेप विधायक अजय विश्नोई और कांग्रेस विधायक सचिन यादव को सदस्य बनाया गया. संसदीय कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया.
समिति ने दो चरणों में बैठकें कर वेतन, भत्तों और पेंशन में बढ़ोतरी का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया. प्रस्ताव भेजने पर सरकार ने निर्देश दिया कि इसमें मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के वेतन-भत्तों को भी शामिल किया जाए. इसके बाद समिति ने संशोधित प्रस्ताव तैयार किया और शासन को भेज दिया.



