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अब अपडेट तकनीकी से लैस होकर डायल 100 बना 112

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अब मध्यप्रदेश में डायल 100 की जगह डायल 112 लोगों की सुरक्षा सेवा में तत्पर रहेगा। इसके अंतर्गत विभिन्न नागरिक सेवाओं को एक नंबर के साथ इंट्रीगेट किया गया है। प्रदेश में जनसुरक्षा के लिए डायल 100 के स्थान पर अब डायल 112 को एकल एजेंसी आधारित सेवा बनाया गया है। पूरे प्रदेश में यह सेवा शुरू की जा रही है। इसमें कॉल करने वाले व्यक्ति की लोकेशन भी जीपीएस से ट्रैक की जा सकेगी।

मध्यपद्रेश में डायल 100 सेवा पिछले एक दशक से जारी है। इसके स्थान पर डायल 112 सेवा शुरु की गई है। इसमें भारत सरकार की आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली की परिकल्पना के अनुरूप अधिकांश जरूरी नागरिक सेवाओं को सम्मिलित कर दिया गया है।

01 नवम्बर 2015 में शुरू की गई डायल-100 सेवा भारत की पहली केंद्रीकृत, राज्य-व्यापी पुलिस आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली थी, जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने अग्रणी रूप से लागू किया। इस सेवा का उद्देश्य था कि पूरे राज्य—चाहे शहरी हो या ग्रामीण क्षेत्र—में संकट की स्थिति में नागरिकों को त्वरित, प्रभावी और तकनीक-सक्षम पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

इसका केंद्रीय कार्यालय भोपाल स्थित सेंट्रल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर था। नागरिक टोल-फ्री नंबर 100 पर कॉल कर सकते थे, जहां प्रशिक्षित कॉल टेकर कंप्यूटर-सहायता प्राप्त डिस्पैच सॉफ़्टवेयर के माध्यम से निकटतम उपलब्ध डायल-100 प्राथमिक प्रतिक्रिया वाहन (FRV) की पहचान कर उन्हें तुरंत भेजते थे।

इस प्रणाली में 1,000 जीपीएस-सक्षम चार-पहिया FRV और 150 दो-पहिया इकाइयाँ शामिल थीं, जिन्हें मोबाइल फोन और मोबाइल डेटा टर्मिनल्स (MDT) से लैस किया गया था। डायल 112 कॉल सेंटर में आपातकाल में कॉलर की लोकेशन प्राप्त करने के लिए LBS (Location Based System) स्थापित है । अब पुलिस के इमरजेंसी वाहन औसतन लगभग 16 मिनट में मदद चाहने वालों के पास उनके द्वार पहुँच रही है । न्याय जन-जन के दरवाजे तक पहुंचाने का संकल्प डायल -100/112 की मदद से सार्थक हो रहा है ।

डायल-100 ने जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय लागू किए:

  • वास्तविक समय वाहन ट्रैकिंग
  • कॉल रिकॉर्डिंग
  • सेवा विश्लेषण और नागरिक प्रतिक्रिया प्रणाली

इस प्रणाली ने अपनी अवधि में जन-सुरक्षा  प्रवर्तन  में एक नया मानक स्थापित किया। हालांकि  प्रारंभ  में  डायल-100 सेवा प्रभावशाली थी, और इसका कार्य केवल पुलिस तक ही सीमित था, परन्तु  कालांतर में  इसमें अग्निशमन, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, और विशेष हेल्पलाइन जैसे—महिला, बाल संरक्षण की हेल्पलाइन को भी जोड़ा गया।

जन-सुरक्षा परिदृश्य के सतत विकास—जैसे बढ़ती नागरिक अपेक्षाएं, शहरी जटिलता, और विभिन्न आपातकालीन एजेंसियों के साथ समन्वित संचालन ज़रूरत के चलते एकल-एजेंसी आधारित सिस्टम की आवश्यकता को जन्म दिया।

इसी पृष्ठभूमि में, भारत सरकार की आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS – डायल 112) की परिकल्पना के अनुरूप, देश में इमरजेंसी नंबर-112 योजनांतर्गत प्रदेश की पुलिस आपातकालीन सेवा (112), स्वास्थ्य/ एम्‍बुलेंस सेवा (108), अग्निशमन सेवा (101), महिला हेल्‍पलाईन (1090), नेशनल सायबर क्राईम हेल्‍पलाईन (1930) एवं रेल मदद हेल्‍पलाईन (139), मध्‍यप्रदेश रोड डेव्‍हलपमेंट कार्पोरेशन – एक्सिडेंट रिस्‍पांस सर्विस (हाईवे टोल नाका 1099), राज्‍य प्राकृतिक आपदा प्रबंधन (एस.डी.एम.ए.-1079), राज्‍य परिवहन विभाग पेनिक बटन एवं गुप्‍तवार्ता विशेष शाखा पु0मु0, महिला एवं चाईल्‍ड हेल्‍प लाईन (181,1098) आदि सेवाओं को एक ही नम्‍बर 112 के साथ इंटीग्रेट किया गया है। डायल 112 सेवा से प्रदेश में अपराधों में कमी आई है, तथा दिन में सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस की उपस्थिती से जनता में सुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई है । इसमें  हर नागरिक के लिए तेज़, समन्वित और जवाबदेह आपातकालीन प्रतिक्रिया सुनिश्चित हुई।

यह प्रणाली आज भी अपने मूल तकनीकी ढांचे और FRVs के साथ समाज के कमजोर वर्गों तक सहायता पहुँचाने में सक्षम बनी हुई है।

डायल-112 में क्या है खास

  1. प्रत्येक शिफ्ट में 100 एजेंट की क्षमता वाला नया कॉन्टैक्ट सेंटर, जिसमें 40 सीटों का डिस्पैच यूनिट है
  2. PRI लाइनों से SIP आधारित ट्रंक लाइन पर माइग्रेशन, जिससे 112 पर कॉल एक्सेस अधिक सहज हो
  3. उन्नत बिज़नेस इंटेलिजेंस (BI) और MIS रिपोर्टिंग टूल्स
  4. नागरिकों और FRV के बीच संपर्क को बेहतर बनाते हुए गोपनीयता बनाए रखने हेतु नंबर मास्किंग समाधान
  5. FRV के रख-रखाव को ट्रैक करने हेतु समग्र फ्लीट मैनेजमेंट सॉफ़्टवेयर
  6. चैटबॉट जैसे नॉन-वॉयस माध्यमों द्वारा नागरिकों से संवाद और शिकायतों की ट्रैकिंग
  7. नागरिकों और पुलिस अधिकारियों के लिए विशेष मोबाइल ऐप्स
  8. ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) सॉफ़्टवेयर, बायोमेट्रिक उपस्थिति के साथ
  9. FRVs में डैशबोर्ड कैमरा और बॉडी वॉर्न कैमरा की व्यवस्था, पारदर्शिता हेतु डायल-112 का आगामी चरण न केवल इसकी बुनियादी ताकतों को सुदृढ़ करेगा, बल्कि इसे एक स्मार्ट, समावेशी और पूर्वानुमान-सक्षम आपातकालीन शासन का मानक बनाएगा। डेटा एनालिटिक्स, उन्नत लोकेशन ट्रैकिंग और IoT-सक्षम फील्ड विजिबिलिटी के माध्यम से यह प्रणाली अब तेजी से प्रतिक्रिया देने, रीयल टाइम फीडबैक लूप से सीखने, और बदलते खतरों के अनुसार खुद को ढालने में सक्षम बन रही है—चाहे वह शहरी अपराध हों या जलवायु जनित आपदाएं।

 

 

 

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