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मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाले विपक्ष के प्रस्ताव को बड़ा झटका लगा है। 130 सांसदों की ओर से हस्ताक्षरित प्रस्ताव को लोकसभा अध्यक्ष ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिससे यह मामला आगे नहीं बढ़ सका।

उधर राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने भी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए सांसदों की ओर से दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी सांसदों ने औपचारिक प्रक्रिया के तहत यह नोटिस दिया था, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग की गई थी। हालांकि दोनों सदनों के स्पीकर ने नियमों का हवाला देते हुए इसे विचार के लिए सूचीबद्ध करने से मना कर दिया।

इस फैसले के बाद राजनीतिक माहौल गरमा सकता है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने वाला कदम बता सकता है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि निर्णय पूरी तरह संसदीय नियमों के तहत लिया गया है। संवैधानिक जानकारों के अनुसार, ऐसे प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष के पास होता है और यह प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित नियमों के अनुरूप ही संचालित होती है।

बता दें कि पिछले महीने विपक्षी दलों के कई सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाने के लिए दोनों सदनों में नोटिस दिया था। हालांकि, नोटिस के बाद लोकसभा और राज्यसभा के सूत्रों ने बताया था कि इन नोटिसों की जांच होगी, उसके बाद ही उन पर अगला कोई कदम उठाया जाएगा।

राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए सांसदों की ओर से दिए गए प्रस्ताव (नोटिस) को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 12 मार्च 2026 को राज्यसभा के 63 सदस्यों द्वारा एक प्रस्ताव का नोटिस दिया गया था। यह नोटिस भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) और अनुच्छेद 124(4) के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 11(2) तथा जजेज (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 के प्रावधानों के तहत दिया गया था।इस प्रस्ताव के जरिए भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग की गई थी।

राज्यसभा सभापति ने नोटिस पर विचार करने के बाद और सभी संबंधित पहलुओं व मुद्दों का सावधानीपूर्वक तथा निष्पक्ष आकलन करने के उपरांत इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। सभापति ने यह निर्णय जजेज (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 की धारा 3 के तहत उन्हें प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए लिया। इस फैसले के साथ ही ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग से जुड़ी यह प्रक्रिया फिलहाल समाप्त हो गई है।

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