उत्तराखंड में कुदरत का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। चमोली जिले के मोपाटा में बादल फटने से तबाही मच गई, दो लोग लापता हो गए और कई मवेशी व गौशालाएं मलबे में दब गईं। वहीं केदारघाटी के लवारा गांव में पुल बह गया है, जिससे छेनागाड़ क्षेत्र का संपर्क पूरी तरह टूट गया है।
रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है, जिससे कई घर डूब गए और प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
हालात इतने गंभीर हैं कि हनुमान मंदिर तक नदी में समा गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राहत-बचाव कार्यों की निगरानी खुद शुरू कर दी है। उधर, लगातार भारी बारिश से कई जिलों—रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चमोली, हरिद्वार और पिथौरागढ़—में आज स्कूल बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। लोगों में 2013 की त्रासदी जैसी दहशत है। प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और बचाव दल पूरी तरह मुस्तैद हैं।
पहाड़ों पर लगातार हो रही भारी बारिश और अतिवृष्टि ने सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। रुद्रप्रयाग जिले के पूर्वी बांगर क्षेत्र में भूस्खलन के कारण छेनागाड़ का पड़ाव पूरी तरह तबाह हो गया है।
तड़के हुई मूसलाधार बारिश के बाद पहाड़ी से आए मलबे के सैलाब में 15 से अधिक दुकानें और मकान बह गए। जिससे 8 लोग लापता हो गए हैं, जिनमें चार नेपाली मजदूर और एक वनकर्मी शामिल हैं। इस घटना में सड़क और पैदल मार्ग भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं जिससे बचाव दल को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
वहीं जखोली ब्लॉक के टेंडवाल गांव में एक आवासीय मकान जमींदोज होने से एक महिला सरिता देवी की मलबे में दबकर मौत हो गई। इधर चमोली के देवाल विकासखंड के मोपाटा गांव में भी भूस्खलन से एक दोमंजिला मकान ढह गया। जिसमें पति-पत्नी तारा सिंह और कमला देवी की मलबे में दबकर मौत हो गई। उनके पास ही रहने वाले एक अन्य दंपती घायल हो गए जिन्हें रेस्क्यू टीम ने अस्पताल पहुंचाया।
मूसलाधार बारिश से ग्राम पंचायत तालजामण में व्यापक नुकसान हुआ है। यहां 12 से अधिक आवासीय मकान मलबे से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ग्रामीणों ने भागकर अपनी जान बचाई। वहीं गौशालों में बंधे 20 मवेशियों की मौत हो गई है। प्रशासन ने गांव के 65 से अधिक परिवारों को स्कूल और पंचायत भवन में शिफ्ट कर दिया है। गांव के चारों तरफ बह रहे बरसाती नाले उफान पर बह रहे हैं।
बारिश से नदियों का जलस्तर भी बढ़ गया है। श्रीनगर में अलकनंदा नदी उफान पर है जिसका जलस्तर खतरे के निशान (536 मीटर) से मात्र 20 सेंटीमीटर नीचे है। धारी देवी मंदिर के पास नदी का पानी मंदिर के पुल तक पहुंच गया है और आसपास की दुकानों में भी घुस गया है।
प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए लोगों को नदी के किनारों से दूर रहने की चेतावनी दी है और पुलिस की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।