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फिल्म समीक्षा:नफ़रत के बाजार में मोहब्बत की दुकान सैयारा

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डॉ. प्रकाश हिंदुस्तानी।

बॉलीवुड में मोहब्बत नामक कंज़्यूमर आइटम बबेचने वाली फैक्टरियों में यशराज फिल्म्स प्रमुख है।  दुकान पुरानी है और एक जैसे माल को बार बार बेहतर पेकिंग करके बेचने में इनकी महारत है। इनका नया माल है सैयारा ! इसका मतलब ट्रेलर में भी है और फिल्म में बार बार बताया गया है। माल में वही सब है जो 13 से 30 की उम्र में युवाओं का  ख्वाब होता है।

रॉक स्टार बनने का सपना,  साथ में पर्सनल गर्लफ्रेंड जो पीछे बाइक पर बैठे, गर्लफ्रैंड के साथ अलीबाग में, बर्फीली वादियों में घूमने का सुख, शांत से बीच पर अटखेलियां, इंटिमेट होना, गाने गाना, एक दूसरे की केयर करना, दूसरे के  लिए त्याग को उतावले रहना और  अंत में फिर मिलने के लिए बिछड़ना। यही तो रेसिपी है और निर्देशक मोहित सूरी की इस बात में मास्टरी है।  जलेबी तो हर कोई बनता है, लेकिन मोहित सूरी की जलेबी का स्वाद ही कुछ अलग है।

मुझे प्रेम कहानियों पर बनाने वाली फ़िल्में पसंद हैं।  यह भी पसंद आई।  यह फिल्म न सिर्फ एक प्रेम कहानी है, बल्कि एक ऐसा एहसास है जो आपको हंसाएगा, रुलाएगा, और अंत में एक मीठी सी खामोशी के साथ छोड़ जाएगा।  फिल्म  एक महत्वाकांक्षी गायक क्रिश कपूर (अहान पांडे) और गीतकार वानी (अनीत पड्डा) के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों की मुलाकात संगीत के मंच पर होती है, जहां उनके सपने और जुनून उन्हें एक-दूसरे के करीब लाते हैं। लेकिन जैसा कि हर सच्ची प्रेम कहानी में होता है, उनके रास्ते में मुश्किलें आती हैं—करियर की जंग, प्यार की दुविधा, और टूटे दिल का दर्द।

यह फिल्म सिर्फ प्यार की शुरुआत नहीं, बल्कि उसके टूटने और फिर से खुद को पाने की यात्रा को दर्शाती है। मोहित सूरी का सिग्नेचर स्टाइल—इमोशनल डेप्थ, म्यूजिकल जादू  और रॉ रोमांस—इस फिल्म में हर फ्रेम में झलकता है। फिल्म का म्यूजिक इसकी रीढ़ है। इंदौर की पलक मुछाल का गाना भी है इसमें। जॉन स्टीवर्ट एडुरी का बैकग्राउंड स्कोर हर सीन को और गहरा बनाता है। विकस शिवरामन की सिनेमैटोग्राफी हर दृश्य को एक कविता की तरह जीवंत करती है, चाहे वो समुद्र तट की रोमांटिक मुलाकात हो या कॉन्सर्ट का जोश।

अहान पांडे (क्रिश कपूर)  डेब्यू कर रहे हैं। उनका किरदार एक रॉकस्टार का है, जो बाहर से बिंदास लेकिन अंदर से टूटा हुआ है। अहान की स्क्रीन प्रेजेंस और इमोशनल सीन्स में उनकी गहराई देखते बनती है। खासकर कॉन्सर्ट और ब्रेकअप सीन्स में उनकी रॉ एनर्जी और वल्नरेबिलिटी दर्शकों को बांध लेती है।  एक डेब्यू एक्टर के लिए उनका काम लाजवाब है। अनीत पड्डा (वानी) भी इस फिल्म से डेब्यू कर रही हैं, और उनकी परफॉर्मेंस आपको हैरान करने वाली है। उनकी आंखों में छुपा दर्द, प्यार, और जुनून हर सीन में चमकता है। अनीत की नैचुरल एक्टिंग और अहान के साथ उनकी केमिस्ट्री फिल्म का हाईलाइट है।

सैयारा की सबसे बड़ी खासियत इसका म्यूजिक और इमोशनल डेप्थ है। यह फिल्म न सिर्फ प्यार की शुरुआत, बल्कि उसके टूटने और हीलिंग की प्रक्रिया को भी खूबसूरती से दिखाती है। यह आशिकी की नॉस्टैल्जिया और कहो ना प्यार है की ताजगी का एक परफेक्ट मिश्रण है, लेकिन अपने यूनिक अंदाज में। नए चेहरों की ताजगी और उनकी केमिस्ट्री दर्शकों को आकर्षित करती है। युवा दर्शकों से कनेक्ट करने वाली कहानियां, जैसे करियर और प्यार की जंग पसंद की जाती हैं।

फिल्म का पहला हाफ कुछ जगहों पर धीमा लगता है। कुछ सीन क्लासिक बॉलीवुड लव स्टोरी के क्लिशे लगते हैं। जैसे, बारिश में रोमांटिक सीन या ब्रेकअप के बाद का ड्रामेटिक मॉन्टाज। ये सीन भले ही खूबसूरती से शूट किए गए हों, लेकिन कुछ दर्शकों को पुराने फॉर्मूले की तरह लग सकते हैं।

देखनीय।

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