राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने मध्य प्रदेश के बाघ आवास क्षेत्रों में तीन परियोजनाओं – ग्रेटर पन्ना लैंडस्केप, संजय डबरी टाइगर रिज़र्व और रातापानी टाइगर रिज़र्व – को मंजूरी दे दी है. इसके अलावा, उत्तराखंड के राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के कोर क्षेत्र में एक रोपवे परियोजना को भी स्वीकृति दी गई है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 9 दिसंबर को हुई बैठक की कार्यवाही के अनुसार, समिति ने सतना के आरक्षित वन क्षेत्र में एक चूना पत्थर खदान को मंजूरी देने की सिफारिश की.
परियोजना प्रस्ताव के मुताबिक, पन्ना टाइगर रिज़र्व की टाइगर संरक्षण योजना के तहत स्वीकृत वन्यजीव कॉरिडोर के भीतर तथा उसके आसपास की 266.302 हेक्टेयर राजस्व भूमि पट्टे पर दी जाएगी.
यह कॉरिडोर पन्ना, बांधवगढ़ और संजय टाइगर रिज़र्व के आवास क्षेत्रों को आपस में जोड़ता है.
अन्य दो टाइगर रिज़र्व – संजय डबरी और रातापानी – में भूमिगत जल पाइपलाइन तथा बरना बांध से संबंधित ढांचागत निर्माण कार्यों को मंजूरी दी गई है.
वहीं, उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिज़र्व के कोर क्षेत्र की 4.54 हेक्टेयर भूमि का उपयोग ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक रोपवे निर्माण के लिए स्वीकृत किया गया है.
समिति ने छत्तीसगढ़ के कबीरधाम ज़िले में स्थित फेन वन्यजीव अभयारण्य के ईको-सेंसिटिव ज़ोन में दो बाक्साइट खनन परियोजनाओं को भी मंजूरी की सिफारिश की है.
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने कहा कि यद्यपि ये खनन पट्टे संरक्षित क्षेत्रों के कोर या बफ़र ज़ोन में नहीं आते, लेकिन फेन अभयारण्य, कान्हा टाइगर रिज़र्व और कान्हा-अचानकमार कॉरिडोर के निकट होने के कारण पारिस्थितिक सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं.
अक्टूबर में 266.3 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले AAA रिसोर्स लिमिटेड के चूना पत्थर खदान पट्टे का निरीक्षण केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया और मध्य प्रदेश वन विभाग की समिति द्वारा किया गया.
निरीक्षण में पाया गया कि खनन पट्टे का कुछ हिस्सा निर्धारित बाघ कॉरिडोर के भीतर आता है. पट्टे का दक्षिणी हिस्सा घने वनों से जुड़ा है और बाघों के आवाजाही के लिए उपयुक्त मार्ग है, जबकि उत्तरी हिस्सा खंडित है.
परियोजना की सिफारिश करते समय समिति ने कहा कि दक्षिणी कॉरिडोर से बाघों की आवाजाही सुनिश्चित करना और उसे मज़बूत बनाना आवश्यक है. इसके लिए खनन गतिविधियों को सीमित रखना और आवास सुधार उपाय करना ज़रूरी होगा.
रोपवे परियोजना पर चर्चा के दौरान उत्तराखंड के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने प्रस्ताव को उचित ठहराया. उनका कहना था कि इससे कांवड़ यात्रा के दौरान होने वाली ट्रैफ़िक भीड़ कम होगी और तीर्थयात्रियों द्वारा उपयोग की जाने वाली वन क्षेत्र से होकर गुजरने वाली सड़क पर वाहनों का दबाव घटेगा.



