24.1 C
Bhopal

अमेरिकी अदालत का बड़ा फैसलाः गलत तरीके से निर्वासित किए गए भारतीय को वापस बुलाने का आदेश

प्रमुख खबरे

वाशिंगटन। अमेरिका की एक संघीय अदालत ने अपने तरह का एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे एक भारतीय नागरिक को फिर से अमेरिका वापस लाने की व्यवस्था करें, जिसे अदालत के साफ आदेश के बावजूद भारत भेज दिया गया था। जज ने फैसला सुनाया कि डिपोर्टेशन गैर-कानूनी था और न्यायिक अधिकार का उल्लंघन था।

9 जनवरी को जारी आदेश में टेक्सास के दक्षिणी जिले की अमेरिकी जिला अदालत ने बताया कि फ्रांसिस्को डी’कोस्टा को 20 दिसंबर 2025 को अमेरिका से निकाला गया, जबकि उसे न हटाने का अदालत का आदेश इससे तीन घंटे पहले ही जारी हो चुका था। अदालत ने कहा कि उसी सुबह उसने डी’कोस्टा की याचिका पर सुनवाई अपने हाथ में ली थी और सरकार को साफ निर्देश दिया था कि अदालत की अनुमति के बिना उसे अमेरिका से बाहर न भेजा जाए।

यह भी कहा कोर्ट ने
कोर्ट ने कहा कि उस आदेश के बावजूद, डीश्कोस्टा को तुर्किश एयरलाइंस की फ्लाइट में बिठा दिया गया, जो उसी दिन दोपहर 2ः55 बजे ह्यूस्टन से रवाना हुई। इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट द्वारा जमा किए गए एक मेमोरेंडम के अनुसार, अमेरिकी अटॉर्नी के कार्यालय, आईसीई अधिकारियों और हिरासत सुविधा को फ्लाइट के रवाना होने से पहले स्टे की सूचना थी।

कोर्ट ने सरकार की दलील को किया खारिज
अदालत ने सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि यह गलती से हुआ। अदालत ने कहा कि हटाने का इरादा चाहे जो भी रहा हो, निर्वासन गैरकानूनी था और यही सबसे अहम बात है। फ्रांसिस्को डी’कोस्टा भारत के मूल निवासी हैं और साल 2009 से अमेरिका में रह रहे थे। अक्टूबर 2025 में एक आव्रजन न्यायाधीश ने उन्हें स्वेच्छा से देश छोड़ने की अनुमति दी थी। बाद में उन्होंने वकील की मदद ली और अपने मामले को फिर से खोलने की अर्जी दी। इसमें उन्होंने कहा कि भारत की परिस्थितियां बदल चुकी हैं और ईसाई धर्म अपनाने के कारण उन्हें वहां उत्पीड़न का खतरा है।

उस याचिका को दायर करने से फेडरल नियमों के तहत उनका स्वेच्छा से देश छोड़ना अपने आप एक अंतिम निष्कासन आदेश में बदल गया। कोर्ट ने कहा कि इमिग्रेशन जज ने स्टे के अनुरोध को खारिज कर दिया था, लेकिन डीश्कोस्टा को हटाए जाने के समय मामले को फिर से खोलने की याचिका पर फैसला नहीं सुनाया था। अदालत ने कहा कि इस स्थिति में डी’कोस्टा को हटाने से उनके कानूनी अधिकार छिन सकते थे और यह न्याय की प्रक्रिया के खिलाफ था।

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

ताज़ा खबरे