मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बयान के खिलाफ महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया।
मध्यप्रदेश कांग्रेस कार्यालय के सामने जुटी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए उनका पुतला दहन किया।
महिला कांग्रेस की प्रदेश महासचिव रूपाली शर्मा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है, जो दलित समाज का अपमान है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
पुतला दहन और की नारेबाजी
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पुतला जलाकर अपना आक्रोश जताया। इस दौरान जमकर नारेबाजी हुई और कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण बना रहा। पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहा।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, विवाद की शुरुआत कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री की पत्नी पर विदेशी संपत्ति और कई पासपोर्ट होने के आरोप लगाए थे। इस पर मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सवाल उठाए थे। इन आरोपों पर जवाब देते हुए हिमंता बिस्वा सरमा ने खरगे पर तीखी टिप्पणी की, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया और कांग्रेस नेताओं में नाराजगी फैल गई। हिमंता ने कहा कि खरगे जी की उम्र हो गई है, लेकिन फिर भी वह एक पागल व्यक्ति की तरह बात कर रहे हैं। बिना सच जाने आप ऐसे आरोप कैसे लगा सकते हैं? यह वैसा ही है जैसे किसी को जान से मार दो और फिर उसे दवा देने की बात करो। उन्होंने आगे यह भी कहा कि खरगे को देश से माफी मांगनी चाहिए और असम पुलिस पवन खेड़ा को पाताल से भी ढूंढ निकालेगी।
आगे भी आंदोलन की चेतावनी
महिला कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्यमंत्री माफी नहीं मांगते हैं, तो विरोध प्रदर्शन आगे भी जारी रहेगा। संगठन ने इसे सम्मान और सामाजिक न्याय से जुड़ा मुद्दा बताया है। महिला कांग्रेस पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा कि असम के मुख्यमंत्री का बयान न केवल एक वरिष्ठ जननेता का अपमान है, बल्कि यह देश की समृद्ध सामाजिक मर्यादाओं और सम्मानजनक संवाद की लोकतांत्रिक परंपरा पर भी एक गहरा आघात है। एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की ऐसी असभ्य भाषा उनकी संकीर्ण और दलित विरोधी मानसिकता को उजागर करती है।



