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मप्र की सबसे उम्रदराज बाघिन ने तोड़ा कॉलर वाली बाघिन का रिकार्ड

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पेंच नेशनल पार्क की ‘लंगड़ी बाघिन’ अब सिर्फ सिवनी ही नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की सबसे उम्रदराज जीवित बाघिन बन गई है।

18 साल की हो चुकी यह बाघिन, जो कभी अपनी शारीरिक कमजोरी के कारण चर्चा में थी, अब अपनी बहन ‘कॉलर वाली बाघिन’ का रिकॉर्ड तोड़कर एक मिसाल बन गई है।

कुछ साल पहले गायब होने पर इसकी मौत की अफवाहें उड़ी थीं, लेकिन हाल ही में पर्यटकों को देखकर यह साबित हो गया है कि यह अभी भी ज़िंदा है और अपने पुराने इलाके कर्माझिरी में लौट आई है।

यह खास बाघिन पहली बार साल 2008 में पर्यटकों और गाइडों को दिखी थी। इसके एक अगले पैर के पंजे को अजीब तरह से रखने के कारण इसे ‘लंगड़ी’ नाम दिया गया था। पेंच नेशनल पार्क के रिकॉर्ड में भी इसका ज़िक्र है। पेंच नेशनल पार्क के प्रबंधक बताते हैं कि यह ‘कॉलर वाली बाघिन’ की बहन है।

‘कॉलर वाली बाघिन’, जिसका जन्म 2005 में हुआ था, 2022 में 17 साल की उम्र में मर गई थी। वहीं, 2008 में जन्मी ‘लंगड़ी बाघिन’ अब 18 साल की हो चुकी है और 2026 तक भी जीवित है। इस तरह, ‘लंगड़ी बाघिन’ ने अपनी ही बहन का रिकॉर्ड तोड़कर मध्यप्रदेश में सबसे ज़्यादा उम्रदराज बाघिन होने का कीर्तिमान स्थापित किया है।

पेंच नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश सिंह ने बताया, ‘पेंच नेशनल की बाघिन कुछ सालों से दिखाई न देने के कारण लोगों ने अफवाह उड़ा दी थी लेकिन वह जीवित है और अक्टूबर और दिसंबर माह में पर्यटकों को दिखाई दी है जिसकी खूबसूरत तस्वीर भी सामने आई है।

जो 2008 में पहली बार दिखाई दी थी जिसके रिकॉर्ड भी मौजूद है, वह 17 वर्ष की उम्र पार कर चुकी है.. अभी शारीरिक रूप से कमजोर हो चुकी है बावजूद सरवाइप कर रही है।’

हालांकि ‘लंगड़ी बाघिन’ अब शारीरिक रूप से थोड़ी कमजोर हो गई है, फिर भी वह अपने इलाके में सर्वाइव कर रही है। अक्टूबर और दिसंबर में पर्यटकों को इसे देखकर खुशी हुई है। पेंच प्रबंधक भी खुश हैं कि उन्हें प्रदेश की सबसे उम्रदराज बाघिन को देखने का मौका मिल रहा है।

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