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साहित्य केवल शब्द सौंदर्य नहीं, बल्कि समाज की चेतना और संवाद  है : रामप्रकाश

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साहित्य केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि समाज की चेतना है। वरिष्ठ साहित्यकार एवं संस्कृतिकर्मी डॉ. रामप्रकाश त्रिपाठी ने यह बात मप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन भोपाल जिला इकाई के बैनर तले इंद्रपाल सिंह ‘तन्हा’ के ग़ज़ल संग्रह ‘ठहरा हुआ वक़्त’ के लोकार्पण एवं चर्चा कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कही।

डॉ. रामप्रकाश कहते हैं कि कहा कि इंद्रपाल सिंह का ग़ज़ल संग्रह हमारे समय, राजनीति और समाज  के हालाता, पीड़ा को दर्शाता दस्तावेज हैं।

इसमें गजल केवल शायरी नहीं है, बल्कि वह प्रतिरोध की भाषा भी है। तन्हा जी की ग़ज़लें शोर नहीं करती, नारे नहीं लगाती, परन्तु हमारे भीतर उतरती  हैं, हमें असहज करती हैं, बेचैन करती है, सवाल करती हैं।

बता दें कि इंद्रपाल सिंह तन्हा का यह दूसरा ग़जल संग्रह है, उनका पहला संग्रह करीब ढाई दशक पहले सारा शहर शीर्षक से आया था।

ग़जल संग्रह पर चर्चा करते हुए शायर बद्र वास्ती और अपर्णा पात्रीकर ने इसे ‘दुष्यंत’ की विरासत का विस्तार बताया।

अपर्णा पात्रीकर जहां इसे ग़मेंदौरां का अक्स बताती हैं, वहीं बद्र वास्ती कहते हैं कि इशारों, प्रतीकों और बिम्बों के माध्यम से तन्हाजी ने अपने गजलों में शेरों को बेहद खूबसूरत अंदाज और भाषा में  पिरोया।

उन्होंने कहा कि इन्द्रपाल सिंह तन्हा ने वर्तमान व्यवस्था के हर पहलू पर बेबाक ढंग से शेर कहे हैं। कार्यक्रम की रूपरेखा मप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन की भोपाल इकाई के अध्यक्ष सुनील कुमार गुप्ता ने प्रस्तुत की‌ और स्वागत उद्बोधन दिया।

अतिथियों का आभार इकाई के सचिव महेश दुबे ‘मनुज’ ने माना। शायर श्री तन्हा ने ‘ठहरा हुआ वक़्त’ से प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ भी किया।

कार्यक्रम का संचालन शैलेन्द्र कुमार शैली ने किया। इस अवसर पर प्रसिद्ध आलोचक डॉ. विजय बहादुर सिंह, कवि राजेश जोशी, महेश अग्रवाल, सुरेश गुप्ता सहित अनेक वरिष्ठ साहित्यकार और साहित्य अनुरागी मौजूद थे।

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