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गैस त्रासदी से जुड़े ईरानी डेरे के तार, जब लोग शहर छोड़ रहे थे ये आकर बस रहे थे

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मध्यप्रदेश पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन चुके ईरानी परिवारों की आपराधिक गतिविधियों की जड़े राजधानी में हुए गैस त्रासदी के बाद के दौर से जुड़ी हैं। जब शहर से बड़ी संख्या में लोग छोड़कर अन्य जगहों पर चले गए थे। इसी खालीपन के दौरान ईरानी परिवार धीरे-धीरे भोपाल में आकर बसने लगे।

स्थानीय लोगों ने बताया कि शुरुआत में ईरानी परिवारों ने भोपाल रेलवे स्टेशन के सिटी साइड इलाके में डेरा डाला। जीवन यापन के लिए वे स्टेशन के बाहर चश्मे, बेल्ट, पेन जैसे छोटे सामान बेचा करते थे। पहले महाराष्ट्र से आए ईरानी परिवार यहां बसे, बाद में दक्षिण भारत के राज्यों से भी परिवार जुड़ते चले गए।

जब गिरोह बना तो वह कुछ ही समय में वे आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने लगे और स्थानीय लोगों से उनका टकराव बढ़ने लगा। पुलिस के अनुसार ईरानी डेरे केवल भोपाल तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अन्य राज्यों में चोरी, लूट और ठगी जैसे संगठित अपराधों में शामिल गिरोहों के लिए भी सुरक्षित पनाहगाह बनते चले गए। इन डेरे में देशभर में सक्रिय ईरानी गिरोहों से जुड़े अपराधियों को शरण दी जाती रही।

करीब 13 से 20 साल पहले तक भोपाल में ईरानी गिरोह का प्रमुख चेहरा मुन्ना ईरानी माना जाता था। उस समय शहर में पदस्थ रहे कुछ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मुन्ने ईरानी आपराधिक गतिविधियों में शामिल था और अन्य अपराधियों को शरण देता था, लेकिन नशे और गांजा तस्करी से दूरी बनाए रखता था।

हालात तब बदले जब उसके करीबी और गिरोह सदस्य राजू ईरानी का उभार हुआ। इसी तरह से राजू से अलग होकर काले और मुख्तार गैंग बना। सभी गुट अपनी पहुंच और संपर्कों के दम पर एक दूसरे के धीरे-धीरे नेटवर्क को कमजोर किया। इसके बाद राजू ने उससे अलग होकर करोंद के अमन कॉलोनी इलाके में अपना अलग डेरा स्थापित कर लिया।

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