मध्यप्रदेश विधानसभा में बुधवार को जन विश्वास 2.0 विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई. इसके बाद विधेयर पारित कर दिया गया.
इसके पहले कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने विधेयक का विरोध किया. कहा, “एक साल बाद भी जन विश्वास 1.0 में कोई ठोस सुधार नहीं दिखा है, ऐसे में 2.0 लाने की जरूरत क्यों पड़ी?” विधेयक में 80 धाराओं में संशोधन कर दिया गया है, लेकिन चर्चा नहीं हुई.
विधायक ने सवाल उठाया, यह विधेयक जमीनी हकीकत को दरकिनार कर सिर्फ अफसरों की राय पर बनाया गया है. आम जनता और विशेषज्ञों की राय लेनी चाहिए थी. वाल्मीकि ने आरोप लगाया, ”पैसे वालों को इस कानून से फायदा होगा, क्योंकि इसमें सिर्फ पेनल्टी का प्रावधान है, जबकि गरीब जेल जाएगा. उदाहरण देते हुए कहा, पहले अवैध नर्सिंग होम चलाने पर जेल होती थी, अब जुर्माना और अधिकारी के विवेक पर छोड़ दिया गया है.
वहीं, भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा, “मोदी सरकार पहली है, जिसने पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को बदला. समय के साथ कानूनों का बदलाव जरूरी है.” बहस के बाद विधेयक को विधानसभा में पारित कर दिया गया.