भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए 2025 उपलब्धियों भरा साल रहा। इस साल देश ने बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच अपनी मजबूत सैन्य शक्ति, रणनीतिक संतुलन और आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन किया। भारत 2025 में अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा डिफेंस पावर बन गया। आस्ट्रेलिया के थिंक टैंक ‘लोवी इंस्टीट्यूट’ द्वारा ‘एशिया पावर इंडेक्स 2025’ में भारत की रक्षा ताकत का लोहा माना गया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की इस उपलब्धि में ऑपरेशन सिंदूर की बड़ी भूमिका रही। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्वदेशी हथियार प्रणालियों की तैनाती और रिकॉर्ड ड्रोन-रोधी कार्रवाइयों के जरिए देश ने अपनी रक्षा तैयारियों को पूरी दुनिया के सामने रखा। इसके साथ ही कई अंतरराष्ट्रीय रक्षा सौदों ने भारत की आत्मनिर्भरता और आयातक से निर्यातक बनने की ओर बढ़ते कदम को और तेज किया।
विशेषज्ञ मानते हैं कि साल 2026 भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद उम्मीदों भरा है। पड़ोसी देशों में अस्थिरता और बदलते हालात को देखते हुए सैन्य तैयारियों को बढ़ावा देने के लिए इस साल रक्षा बजट में 20 से 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी की बात की जा रही है। वहीं सरकार ने आने वाले साल में रक्षा उत्पादों के निर्यात को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। 2029 तक रक्षा उत्पादों के निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय ने साल 2025 को रिफॉर्म के साल के तौर पर घोषित किया था। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश ने रक्षा उत्पादन और निर्यात में अब तक की सबसे बड़ी छलांग लगाई है। स्वदेशी हथियार और रक्षा प्रणालियों, आधुनिक ड्रोन तकनीक, रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर और रिकॉर्ड रक्षा निर्यात ने भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में मजबूत खिलाड़ी बना दिया है। वहीं 2026 में रक्षा क्षेत्र में तेज विकास, बड़े पैमाने पर निर्यात, आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के विस्तार की उम्मीदें हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में रक्षा निर्यात में लगभग 35 गुना की बढ़ोतरी हुई है। वहीं भारत का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में मार्च 2026 तक लगभग 30 हजार करोड़ रुपये और 2029 तक 50 हजार करोड़ रुपये का निर्यात करना है। 2024-25 में भारत का रक्षा निर्यात लगभग 24 हजार करोड़ रुपये रहा।
आज भारत से 100 से ज्यादा देशों को रक्षा उत्पाद निर्यात किए जा रहे हैं। पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल मोहन भंडारी कहते हैं कि 2025 में भारतीय सेनाओं ने दिखा दिया कि हम किसी भी चुनौती से निपटने को तैयार हैं। पूरी दुनिया को भारत की सामरिक तैयारियों के बारे में पता चला। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को लेकर किए जा रहे प्रयासों का भी प्रभाव ऑपरेशन सिंदूर के तहत दिखाई दिया। यही कारण है कि आज कई देश भारत में बने हुए हथियारों को खरीदने की इच्छा रखते हैं। वहीं आने वाला साल भारत के डिफेंस सेक्टर के लिए ऐतिहासिक होने वाला है। बांग्लादेश, नेपाल और आसपास के देशों में अस्थिर हालात को देखते हुए आज हमारी सेनाओं को कई मोर्चों पर एक साथ लड़ने के लिए तैयार रहने की जरूरत है। ऐसे में बजट 2026-27 में भारतीय रक्षा बजट में 25 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
ऑपरेशन सिंदूर और दुनिया भर में चल रही लड़ाइयों से ये साफ हो गया है आने वाले समय में लड़ाइयों में ड्रोन और आधुनिक तकनीक की अहम भूमिका होगी। इसको देखते हुए 2026 में इस दिशा में बड़ी तैयारी देखी जा सकती है। वहीं ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एआई सर्विलांस की बेहद जरूरत महसूस की गई। ऐसे में इस दिशा में भी निवेश की जरूरत है। भारत की सीमाओं के आसपास अस्थिर हालात को देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि देश नए और आधुनिक एयरक्राफ्ट की जरूरतों को पूरा करने के लिए 2026 में बड़े फैसले ले। संभव है कि रूस के पांचवी पीढ़ी के एयरक्राफ्ट SU-57 को लेकर कोई डील सामने आए। वहीं अमेरिका से भी व्यापार घाटे को कम करने के लिए कुछ डिफेंस डील हो सकती हैं। आने वाले समय में इंडियन ओशियन गतिविधियों का केंद्र रहने वाला है। आज यहां भारतीय नेवी का दबदबा है। अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए भारतीय नेवी 2026 में कुछ और आधुनिक हथियार और लड़ाकू शिप इस रीजन में बढ़ा सकती है।
अपने आस पड़ोस में बढ़ती अस्थिरता और चुनौतियों को देखते हुए देश को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना होगा। भारत में चलाया जा रहा आत्मनिर्भरता अभियान खासतौर पर भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए बेहद जरूरी है। किसी मुश्किल हालात में कौन सा देश आपकी मदद करेगा या आपकी आवश्यकता की जरूरतों को पूरा करेगा ये कह पाना मुश्किल है। ऐसे में हमें अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने डिफेंस प्रोडक्शन को और बढ़ाने की जरूरत है। सरकार भी इस दिशा में जोर दे रही है। 2026 में हम डिफेंस उत्पादन को रिकॉर्ड ऊंचाईयों पर पहुंचता देख सकते हैं। सरकार ने मार्च 2026 तक रक्षा निर्यात भी 30 हजार करोड़ रुपये के करीब पहुंचने की बात कही है जो देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
मोहन भंडारी कहते हैं कि हमें ध्यान रखना होगा कि हमारे दुश्मन कभी नहीं चाहते हैं कि भारत आत्मनिर्भर हो या आर्थिक विकास को तेज गति दे सके। इसके लिए वो देश के अंदर हालात बिगाड़ने के लिए समय समय पर कई तरह की साजिशें करते रहते हैं। ऐसे में देश के अंदर शांति बनाए रखने के लिए एजेंसियों को और मुस्तैद रहना होगा। वहीं इंटेलिजेंस एजेंसियों को किसी भी समय हालात बिगड़ने के पहले उसे नियंत्रित करने के लिए निगरानी बढ़ानी होगी।
रक्षा क्षेत्र में उत्पादन का इकोसिस्टम
भारत सरकार रक्षा क्षेत्र के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के प्रयास कर रही है। इसके तहत पूरे देश में रक्षा उपकरणों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। इसके तहत उत्तर प्रदेश में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का विकास किया जा रहा है। इसमें लगभग 35 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाना है। वहीं इसमें लगभग 52 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। वहीं दूसरा डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरीडोर तमिलनाडु में विकसित किया जा रहा है। इन दोनों गलियारों ने मिलकर 9145 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आकर्षित किया है और 289 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। इस गलियारों से अक्टूबर 2025 तक लगभग 66423 करोड़ रुपये के निवेश हुआ है। इसी तरह देश के पहले ऑटोनॉमस मैरीटाइम शिपयार्ड जो नौसेना और समुद्री रक्षा प्लेटफॉर्म के लिए विशेष रूप से तैयार होगा, को मंजूरी मिली है।
2025 के सुधार, 2026 में ऑपरेशनल बढ़त
वर्ष 2025 को ‘सुधारों का वर्ष’ घोषित किया गया था। इसके तहत आधुनिकीकरण, इनोवेशन और नई रक्षा खरीद को बढ़ावा दिया गया है। संयुक्त थिएटर कमांड बनाया जा रहा है। साइबर-स्पेस क्षमताओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित युद्ध प्रणालियों पर विशेष जोर दिया गया है। नए नियमों के तहत 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रक्षा खरीद प्रक्रिया सरल और तेज बनी। 2026 में उम्मीद है कि ये सुधार जमीन पर ठोस परिणाम देंगे। सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल तैनाती, स्वदेशी प्लेटफॉर्म की तैनाती और फ्यूचर-रेडी फोर्स की दिशा में भारत निर्णायक बढ़त हासिल करेगा।
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल अमरदीप त्यागी कहते हैं कि पूरी दुनिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं। आज की दुनिया मल्टी पोलर हो गई है। ऐसे में भारत की मजबूत स्थिति के लिए जरूरी है कि तैयारी इसी आधार पर की जाए। नेपाल और बांग्लादेश में अस्थिरता का माहौल है। वहीं पाकिस्तान और चीन से पहले से ही हमारे सीमा विवाद हैं। ऐसे में हमारी तीनों सशस्त्र सेनाओं को हर स्थिति के लिए तैयार रहने की जरूरत है। आज के युद्ध में आधुनिक तकनीक और हथियारों की भूमिका काफी बढ़ चुकी है। हमें सेनाओं को आधुनिक तकनीक और बेहतर हथियार उपलब्ध कराने के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी करने की जरूरत है।
आधुनिक तकनीक और आत्मनिर्भरता से मजबूत होगा रक्षा क्षेत्र
भारतीय रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने और रक्षा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार कई तरह के प्रयास कर रही है। सागर डिफेंस इंजीनियरिंग के को फाउंडर मृदुल बाबर कहते हैं कि 2025 में, भारत के डिफेंस इकोसिस्टम में जबरदस्त ग्रोथ देखी गई। इसकी खासियत घरेलू उत्पादन, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया जाना था। इस साल डिफेंस सेक्टर को आत्मनिर्भरता से ज्यादा मजबूती मिली। ऑटोनॉमस और मानव रहित सिस्टम जैसे उभरते क्षेत्रों में काफी तेजी से काम किया जा रहा है। आने वाले समय में देश में एक ऐसा इकोसिस्टम विकसित होने की उम्मीद है जिसमें हम देखेंगे कि देश की सेनाओं की जरूरत का ज्यादातर सामान देश में ही बनेगा।
खबरों के मुताबिक 2026-27 बजट में सरकार रक्षा बजट में भारी वृद्धि कर सकती है। वहीं रक्षा उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने का ऐलान किया जा सकता है। वित्त वर्ष 2027 के लिए रक्षा बजट आवंटन में लगभग 20-25% की वृद्धि देखी जा सकती है। इसके अलावा सरकार रक्षा विनिर्माण और खरीद को नियंत्रित करने वाले मौजूदा नियमों और प्रक्रियाओं में सुधार करने के लिए भी कुछ ऐलान कर सकती है।
रक्षा उत्पादन और निर्यात के नए रिकॉर्ड बने
भारत ने रक्षा उत्पादन में 2025 में रिकॉर्ड सफलता हासिल की है। देश का रक्षा उत्पादन लगभग 1.54 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है। इसके अलावा रक्षा उत्पादों के निर्यात में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 24 हजार करोड़ के रक्षा उत्पादों का निर्यात किया गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब 12 फीसदी ज्यादा है। वहीं आने वाले साल में इसके लगभग 30 हजार करोड़ से ज्यादा रहने की उम्मीद है। सरकार की नीतियाँ और “मेक इन इंडिया” अभियान के कारण आज 65% से अधिक रक्षा उपकरण देश में ही निर्मित किए जा रहे हैं। इसने आयात पर निर्भरता को कम किया है और घरेलू उद्योग की प्रतिस्पर्धा और क्षमता को बढ़ाया है।



