खाद्य तेलों के बढ़े दाम की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। खासतौर पर रिफाइंड के दामों में आए उछाल से घर की थाली महंगी होती जा रही है। पिछले कुछ हफ्तों में रिफाइंड के दामों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, इससे लोगों को रोजमर्रा के खर्च में कटौती करनी पड़ रही है।
पश्चिम एशिया में युद्ध के असर से खाद्य तेलों की कीमतों में उछाल आया है। ये प्रति लीटर 15 से 18 रुपये तक महंगे हो गए हैं। हालात नहीं सुधरे तो कारोबारी आने वाले दिनों में खाद्य तेल की कीमतें और बढ़ने की आशंका जता रहे हैं। इसका सीधा असर आम आदमी की रसोई पर पड़ेगा। साथ ही, खाद्य तेलों से बनने वाले नमकीन, स्नैक्स व अन्य उत्पाद भी महंगे हो जाएगे। इसका असर आम आदमी की रसोई और बजट पर पड़ेगा।
पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से पाम ऑयल का आयात प्रभावित है। जहाज तेल लेकर बंदरगाह तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इस वजह से कंपनियों ने खाद्य तेलों की कीमत बढ़ा दी है। बीते एक महीने में करीब 15 से 18 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो चुकी है। शहर का श्यामगंज बाजार खाद्य तेल की बड़ी मंडी है। यहां से प्रतिदिन हजारों लीटर खाद्य तेल की बिक्री होती है।
यहां से तेल बदायूं, पीलीभीत, शहजहांपुर, रामपुर, हल्द्वानी समेत अन्य शहरों को जाता है। कारोबारी बताते हैं कि पीछे से माल की कमी चल रही है। शहर के होलसेल डीलरों को महंगा माल मिल रहा है। इस वजह से बाजार में भी दामों में तेजी आ गई है। अगर आगे भी संकट बरकरार रहा तो दाम और बढ़ने की आशंका है। कारोबारियों ने बताया कि परिवहन भी महंगा हो गया है।
युद्ध के संकट के चलते तेल कंपनियां पुराने दामों पर बाजार में माल बेचने से कतरा रही हैं। मजबूरन कारोबारी नए रेट पर माल बुक कर रहे हैं। कुछ व्यापारियों के पास पुराने रेट का माल भी है। रिटेल काउंटर पर दोनों माल बिक रहे हैं। एक माल के दो दाम होने से बाजार में असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है।
युद्ध के संकट के चलते मेवे को दामों में भी वृद्धि हो रही है। पश्चिमी देशों से आने वाले बादाम, पिस्ता महंगे हो गए हैं। व्यापारी बताते हैं कि 3200 रुपये बिकने वाला बादाम गिरी 3800 रुपये प्रतिकिलो पहुंच गया है। इसी तरह 1,000 रुपये बिकने वाला पिस्ता 1,400 रुपये, सादा पिस्ता 2,800 से 3,400 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। अगर युद्ध नहीं रुका तो और इनकी कीमतें और बढ़ने की आशंका है।
शहर के बाजारों में खाद्य तेल पहले जो तेल 130-140 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था, अब वह 160-170 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, रिफाइंड का बिकने वाला पीपा करीब 500 रुपये महंंगा हो गया है। इसका सीधा असर घरों के किचन पर पड़ा है, जहां अब तेल का इस्तेमाल सीमित करना मजबूरी बन गया है।
गृहिणियों का कहना है कि रसोई का खर्च पहले ही बढ़ा हुआ था, अब तेल महंगा होने से परेशानी और बढ़ गई है। तले-भुने व्यंजनों में कटौती करनी पड़ रही है। होटल और ढाबा संचालकों कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं।
शहर के व्यापारी नितेश गुप्ता ने बताया कि रिफाइंड की कीमतों में तेजी, आयात में कमी और परिवहन लागत बढ़ने के कारण यह स्थिति बनी है। अगर यही हाल रहा तो निश्चित ही रेट अभी और बढ़ सकते हैं।
तेल व्यापारी गौरव गुप्ता का कहना है कि रिफाइंड का लगभग हर व्यंजन का अहम हिस्सा है। अगर जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले दिनों में आम आदमी की थाली पर बोझ और बढ़ सकता है।



