नई दिल्ली। हरियाणा के शिकोहपुर लैंड डील मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के पति और कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा पर शिकंजा कस दिया है। मंगलवार को करीब 6 घंटे तक पूछताछ करने के बाद लैंड डील मामले में ईडी आज फिर रॉबर्ट वाड्रा से पूछताछ करेगी। इसके लिए वह ईडी दफ्तर पहुंच गए हैं। ईडी के सामने पेश होने से पहले वाड्रा ने सोशल मीडिया में पोस्ट डालकर अपना दर्द बयां किया है।
रॉबर्ट वाड्रा ने फेसबुक पर एक पोस्ट डालकर कर कहा कि मेरे जन्मदिन के सप्ताह की सेवा कुछ दिनों के लिए रोक दी गई है। मैंने बुजुर्गों को भोजन कराने और विभिन्न क्षेत्रों के सभी बच्चों को उपहार देने की जो योजनाएं बनाई हैं, उन्हें मैं तब तक जारी रखूंगा जब तक कि सरकार मुझे अच्छे काम करने और अल्पसंख्यकों के प्रति उनके अन्यायपूर्ण व्यवहार के बारे में बोलने से नहीं रोकती, या फिर अगर मेरे राजनीति में आने की इच्छाएं और बातें भी होती हैं। वाड्रा ने कहा कि लोगों की इच्छाओं और जरूरतों को पूरा करने से मुझे कोई नहीं रोक सकता। मैं यहां किसी भी तरह के अन्यायपूर्ण दबाव के लिए तैयार हूं। मैं सत्य में विश्वास करता हूं और सत्य की जीत होगी।
क्या है शिकोहपुर जमीन घोटाला?
बता दें कि जिस लैंड डील मामले में ईडी ने राबर्ट वाड्रा से पूछताछ कर रही है यह मामला 2008 का है। उस समय हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा थे। हरियाणा सरकार ने इस जमीन में से 2.70 एकड़ जमीन को कमर्शियल कॉलोनी के तौर पर डेवलप करने की इजाजत देते हुए रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी को लाइसेंस दिया था। लेकिन कॉलोनी विकसित करने की बजाय रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी ने इस जमीन को 2012 में 58 करोड़ रुपये में डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड को बेच दिया था।
वाड्रा पर आरोप: लैंड डील में कमाया करोड़ों का मुनाफा
आरोप है कि हरियाणा सरकार से कम दाम पर मिली इस जमीन को डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड को बेचकर रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने करोड़ों का मुनाफा कमाया था। रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने 18 सितंबर 2012 को सेल डील के जरिए इस जमीन को तो डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड को बेच दिया था लेकिन हरियाणा सरकार के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने लाइसेंस को ट्रांसफर करने की फाइनल परमिशन नहीं दी थी।