मध्य प्रदेश कांग्रेस के एक और विधायक की विधानसभा सभा सदस्यता पर खतरा मंडरा रहा है। रीवा जिले की सेमरिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा को हाईकोर्ट से झटका लगा है। जबलपुर हाईकोर्ट ने अभय मिश्रा की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने अपनी जीत की याचिका को चुनौती देने वाली याचिका के खिलाफ लगाया था।
अभय मिश्रा ने अपने खिलाफ दायर चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही निरस्त करने की मांग हाईकोर्ट से की थी। जस्टिस विनय सराफ की एकलपीठ ने स्पष्ट कहा कि याचिका में उठाए गए आरोप गंभीर हैं और इनकी विधिवत सुनवाई आवश्यक है। ऐसे में अब यह मामला ट्रायल के लिए आगे बढ़ेगा। जिसके बाद अभय मिश्रा की याचिका को खारिज कर दिया गया।
क्या है पूरा विवाद
अभय मिश्रा ने कांग्रेस के टिकट से 2023 का विधानसभा चुनाव सेमारिया सीट से लड़ा था। उनके खिलाफ बीजेपी ने केपी त्रिपाठी को टिकट दिया था। अभय मिश्रा को इस सीट पर मात्र 637 वोटों से जीत मिली थी। अभय मिश्रा को कुल 56,024 वोट मिले थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 55,387 वोट मिले थे। जिसके बाद केपी त्रिपाठी ने अभय मिश्रा की जीत को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
केपी त्रिपाठी ने अपनी याचिका में कहा कि अभय मिश्रा ने नामांकन के दौरान दिए गए शपथ पत्र (फॉर्म-26) में कई महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई हैं। केपी त्रिपाठी की याचिका में कहा गया था कि अभय मिश्रा अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का उल्लेख नहीं किया और “नॉट एप्लीकेबल” लिखा। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए केपी त्रिपाठी ने दावा किया कि उनके खिलाफ 9 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। कोर्ट ने माना कि यदि यह आरोप सिद्ध होते हैं, तो इसे भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में रखा जा सकता है।
अभय मिश्रा सेमारिया विधानसभा सीट से दूसरी बार विधायक बने हैं। उनकी पत्नी नीलम त्रिपाठी भी एक बार इस सीट से विधायक रह चुकी हैं। अभय मिश्रा पहली बार बीजेपी के टिकट से विधायक बने थे। उसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले वह बीजेपी में शामिल हुए थे लेकिन टिकट नहीं मिलने के कारण वह फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए थे। वह रीवा जिला पंचायत के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।



