देशभर में अगले साल होने वाली जनगणना की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश में भी प्रशासनिक व्यवस्थाएं की जा रहीं हैं।
जनगणना के लिए 3 दिन बाद मप्र की प्रशासनिक सीमाएं फ्रीज कर दी जाएंगी। राज्य के सभी जिलों, तहसीलों, थानों सहित सभी प्रशासनिक सीमाएं 31 दिसंबर यानि बुधवार को फ्रीज की जाएंगी।
इससे पहले राज्य सरकार ने अगले साल होने वाली जनगणना के लिए अधिकारियों को तैनात कर दिया है। इस संबंध में गृह विभाग ने आदेश जारी किए हैं जिसमें जनगणना अधिकारियों की तैनाती के साथ उन्हें जनगणना के अधिकार प्रदान किए गए हैं।
कलेक्टर को जिले का प्रमुख जनगणना अधिकारी बनाया गया है जबकि संभागायुक्त को संभागीय जनगणना अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा कलेक्टर द्वारा तय किया गया अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर या डिप्टी कलेक्टर स्तर का अधिकारी जिला जनगणना अधिकारी होगा।
जिलों में कलेक्टर द्वारा नामांकित अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर या डिप्टी कलेक्टर को जिला जनगणना अधिकारी बनाया जा सकेगा। जिला योजना और सांख्यिकी अधिकारी, अतिरिक्त जिला जनगणना अधिकारी होंगे जबकि एसडीएम अनुविभागीय जनगणना अधिकारी बनाए गए हैं। तहसीलदार चार्ज जनगणना अधिकारी तथा अतिरिक्त तहसीलदार या नायब तहसीलदार, अतिरिक्त चार्ज जनगणना अधिकारी बनेंगे।
इसी प्रकार नगर निगम आयुक्त या प्रशासक, प्रमुख जनगणना अधिकारी बनाए गए हैं जबकि इनके द्वारा नामांकित अपर आयुक्त, उपायुक्त अथवा अन्य वरिष्ठ अधिकारी, नगर जनगणना अधिकारी बनाए गए हैं। नगर निगम के जोनल अधिकारी, जोनल चार्ज जनगणना अधिकारी होगे। शहरों में मुख्य नगरपालिका अधिकारी या मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मुख्य प्रशासक अधिकारी- चार्ज जनगणना अधिकारी बनाए गए हैं।
जनगणना में अड़ंगा डालनेवाले को जुर्माना भरना पड़ेगा
जनगणना के काम में किसी भी प्रकार की बाधा महंगी पड़ सकती है। गृह विभाग के आदेश में जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 का जिक्र करते हुए साफ कहा गया है कि जनगणना के काम में अड़ंगा डालनेवाले को 1 हजार रुपए का जुर्माना भरना पड़ेगा। दोष सिद्ध होने पर उसे 3 साल की सजा भी हो सकती है।



