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बृजभूषण शरण सिंह ने की यूजीसी नियम वापस लेने की मांग, कहा यह देशहित में नहीं

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यूजीसी का नया नियम समाज में भेदभाव को बढ़ावा देगा, ये देश के हित में नहीं है। इस नियम को तत्काल वापस लिया जाए। ये मांग कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने की है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो साझा किया है।

पूर्व सांसद ने कहा कि यूजीसी के नए नियम को वापस कराने के लिए यदि आवश्यकता पड़ी तो आंदोलन किया जाएगा। आंदोलन में सिर्फ सवर्ण ही नहीं, ओबीसी, एससी वर्ग के भी प्रबुद्ध वर्ग शामिल होंगे।

पूर्व सांसद ने कहा कि कई दिनों से यूजीसी (UGC Act 2026) पर विवाद चल रहा है। नए नियम में सवर्ण के बच्चों के द्वारा घटना करने पर कार्रवाई व ओबीसी व एससी वर्ग के छात्रों के संरक्षण की बात कही गई है। इस नियम के कारण देश में बड़ी भ्रामक स्थिति बनी हुई है।

पूर्व सांसद ने कहा कि हमारे गांवों में सभी वर्ग के बच्चे कई वर्ष से एक साथ खेलते हैं। यदि ऐसा होगा तो बच्चे जाति देखकर दोस्ती करेंगे। आपसी भाईचारा व प्रेम समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि जो नीचे हैं, उन्हें ऊपर लाना है। ऑफिस में बैठकर समाज नहीं चलाया जा सकता है, समाज चलाने के लिए गांव आइए।

सनातन वाटिका बनाने जा रहा हूं: बृजभूषण सिंह

पूर्व सांसद ने सवर्ण समाज के लोगों से अपील की कि वह ओबीसी व अनुसूचित वर्ग के समझदार लोगों से बात करें और उनसे इस नियम को वापस लेने के लिए मांग करने के लिए कहें। सनातन धर्म सभी को जोड़ता है, इसलिए मैंने राष्ट्रकथा कराई है। अब सनातन वाटिका बनाने जा रहा हूं।

उधर, कैसरगंज सांसद करन भूषण सिंह ने एक्स पर की गई पोस्ट में कहा कि इंटरनेट मीडिया व समाचार चैनल के माध्यम से यूजीसी के नए नियम को लेकर मेरे विरुद्ध अनेकों प्रकार की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। बिना मेरा पक्ष जाने ऐसा कैंपेन चलाया जाना दुर्भाग्य पूर्ण है।

सांसद ने कहा, ‘मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि संसद की जिस स्टैंडिंग कमेटी का सदस्य हूं उस कमेटी का इन नियमों के निर्माण में कोई भी योगदान नहीं था। मेरी भावनाएं हमारे समाज के लोगों के साथ है और मेरी मांग है कि यूजीसी अपने इस नियम पर पुन: विचार करते हुए जनभावना का सम्मान करें और इसमें आवश्यक सुधार लेकर आए, जिससे समाज में जाति आधारित किसी प्रकार की भेदभाव न फैलने पाए। हम अपने शिक्षण संस्थाओं को जातिगत युद्ध का केंद्र बनने नहीं देंगे। हम सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं’।

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