भोपाल। राजधानी भोपाल के बड़ा तालाब के आसपास हो रहे अतिक्रमण को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव चिंतित हो गए हैं। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सीएम हाउस में एक बड़ी बैठकर जिम्मेदार अधिकारियों को इस मामले में सख्त कदम उठाने के निर्देश भी दे दिए। बैठक में सीएस अनुराग जैन, एससीएस सीएमओ डॉ. राजेश राजौरा, सचिव पर्यावरण नवनीत मोहन कोठारी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
सीएम ने कहा कि भोपाल का बड़ा तालाब हमारी समृद्ध धरोहर का हिस्सा है। ऐसे में सर्वे कराकर इसके संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। बड़े तालाब के आस-पास हो रहे अवैध निर्माण और सीहोर से बड़े तालाब में आने वाले जल को अवरूद्ध करने वाली संरचनाओं के विरूद्ध कार्रवाई की जाए। सभी जिम्मेदार अधिकारी भोपाल ताल के आस-पास हो रही निर्माण गतिविधियों के प्रति सतर्क रहें और उनके विरूद्ध तत्काल कार्रवाई करें।
औद्योगिक इकाईयों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की नदियों तथा अन्य जल संरचनाओं को प्रदूषण से मुक्त रखने के लिए इनके आस-पास की औद्योगिक इकाईयों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित हो कि औद्योगिक इकाइयों द्वारा उनके यहां से निकलने वाले डिस्चार्ज का प्लांट में ही ट्रीटमेंट किया जाए, बड़े होटलों पर भी यह व्यवस्था लागू हो। बैठक में सिंहस्थ-2028 के दृष्टिगत क्षिप्रा तथा कान्ह नदी के जल की गुणवत्ता की निरंतर मॉनिटरिंग तथा इस संबंध में जनजागृति के लिए विशेष गतिविधियां चलाने के निर्देश दिए गए।
नदियों के आस-पास हो रहे खनन को रोकना
सीएम ने कहा कि जल संरचनाओं में जल जीवों, जल वनस्पतियों की स्थिति और जल की गुणवत्ता के अध्ययन के लिए विश्वविद्यालयों को भी साथ जोड़ा जाए। नदियों के आस-पास हो रहे खनन गतिविधियों को नियंत्रित करना आवश्यक है। इसके साथ ही खनन के बाद छोड़े दिए गए गड्ढों को भरने के लिए नगरीय निकाय और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का दायित्व निर्धारित किया जाए। खनन के बाद छूटे स्थानों को तालाब के रूप में विकसित किया जा सकता है, इससे आस-पास के क्षेत्र के जल स्तर में भी सुधार होगा।
वायु गुणवत्ता सुधार के लिए किए जाएं विशेष प्रयास
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, देवास और सागर के साथ-साथ सिंगरौली और मंडीदीप की वायु गुणवत्ता सुधार के लिए भी विशेष प्रयास किए जाएं। सीएम ने कहा कि वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए किसानों को नरवाई न जलाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से पर्यावरण विभाग, कृषि विभाग के साथ अभियान चलाए। नगरीय क्षेत्र में धूल व प्रदूषण को कम करने के लिए निर्माण गतिविधियों में विशेष सावधानी बरती जाए तथा रेडीमिक्स कांक्रीट के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने पुराने वाहनों से हो रहे प्रदूषण की ओर भी सतर्क रहने की आवश्यकता बताई।