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कोरोना के बाद वायु प्रदूषण से सांस की बीमारियों की बड़ी लहर की आशंका

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साल 2019 के आखिरी के महीनों में दुनियाभर में कोरोना महामारी की शुरुआत हुई थी। देखते ही देखते ये संक्रामक रोग वैश्विक स्वास्थ्य जोखिम बन गया। करोड़ों लोग इस वायरस की चपेट में आए और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। मसलन करीब तीन दशकों में कोरोना को दुनियाभर के लिए सबसे गंभीर स्वास्थ्य संकट कहा जा सकता है।

समय के साथ कोरोना का असर तो कम हो गया है, हालांकि एक नई संकट को लेकर वैज्ञानिकों के बीच गंभीर चिंता देखी जा रही है। विशेषकर भारतीय आबादी के बीच बढ़ते इस स्वास्थ्य जोखिम को लेकर विशेषज्ञ अलर्ट कर रहे हैं।

यूके-स्थित भारतीय मूल के श्वसन रोग विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कोरोना महामारी के बाद वायु प्रदूषण शायद भारत के सामने आया सबसे बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है। अगर तुरंत इसे कंट्रोल करने की दिशा में कार्रवाई नहीं की गई तो यह हर साल और गंभीर संकट बढ़ाता जाएगा। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में अगर भारत ने प्रभावी कदम न उठाए तो आने वाले वर्षों में इसके गंभीर दुष्प्रभाव झेलने पड़ सकते हैं।

डॉक्टर्स की टीम ने चेताया है कि बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण सांस की बीमारियों की एक बड़ी लहर आने वाली है, इसका अभी तक ठीक से पता नहीं चल पाया है और न ही इसका इलाज हो रहा है। ये स्वास्थ्य सेवाओं पर आने वाले वर्षों में अतिरिक्त दबाव भी बढ़ाने वाली स्थिति हो सकती है जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट हो जाना चाहिए।

न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत करते हुए यूके में प्रेक्टिस करने वाले कई सीनियर डॉक्टरों ने जोर देकर कहा कि भारतीय आबादी पर सांस की बीमारियों का एक बड़ा संकट आने की आशंका है। इसकी लहर भारतीय नागरिकों और इसकी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर एक भारी और दीर्घकालिक असर डालने वाली हो सकती है।

विशेषज्ञों की टीम ने कहा, पिछले एक दशक में दिल की बीमारियों में वैश्विक स्तर पर बढ़ोतरी हुई है। इसके लिए सिर्फ मोटापा ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि अध्ययनों में पाया गया है कि शहरी ट्रांसपोर्ट से निकलने वाले जहरीले धुएं के संपर्क ने भी लोगों में इसका जोखिम बढ़ाया है। ऑटोमोबाइल और विमान से होने वाला प्रदूषण भी दिल की सेहत को क्षति पहुंचाते हुए देखा गया है।

भारत में दिल की बीमारियों का बोझ हम पहले से ही झेल रहे हैं, इस पर सांस की समस्याएं अगर बढ़ीं तो स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर होने का खतरा है।

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