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प्रयागराज समापन के बाद पीएम ने मांगी माफी बोले, कुछ कमी रह गई हो तो क्षमा करें

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प्रयागराज में 45 दिनों तक चले भव्य महाकुंभ मेले का समापन हो गया. इस आयोजन में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने आस्था और भक्ति के साथ त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान किया!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ के समापन पर एक ब्लॉग लिखा है, जिसमें उन्होंने महाकुंभ को ‘एकता का महायज्ञ’ बताया है। इसके साथ ही उन्होंने महाकुंभ की व्यवस्थाओं में कमी को लेकर जनता से माफी भी मांगी है।

पीएम मोदी ने महाकुंभ में व्यवस्थाओं में कमी को लेकर माफी मांगते हुए लिखा, ‘मैं जानता हूं, इतना विशाल आयोजन आसान नहीं था। मैं प्रार्थना करता हूं मां गंगा से, मां यमुना से, मां सरस्वती से. हे मां हमारी आराधना में कुछ कमी रह गई हो तो क्षमा करिएगा। जनता जनार्दन, जो मेरे लिए ईश्वर का ही स्वरूप है, श्रद्धालुओं की सेवा में भी अगर हमसे कुछ कमी रह गई हो तो मैं जनता जनार्दन का भी क्षमाप्रार्थी हूं।

पीएम ने लिखा, ‘ये कुछ ऐसा हुआ है, जो बीते कुछ दशकों में पहले कभी नहीं । ये कुछ ऐसा हुआ है, जो आने वाली कई-कई शताब्दियों की एक नींव रख गया है। प्रयागराज में जितनी कल्पना की गई थी, उससे कहीं अधिक संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचे।

इसकी एक वजह ये भी थी कि प्रशासन ने भी पुराने कुंभ के अनुभवों को देखते हुए ही अंदाजा लगाया था, लेकिन अमेरिका की आबादी के करीब दोगुने लोगों ने एकता के महाकुंभ में हिस्सा लिया, डुबकी लगाई।

पीएम मोदी ने कहा कि प्रयागराज में हुआ महाकुंभ का ये आयोजन, आधुनिक युग के मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स के लिए, प्लानिंग और पॉलिसी एक्सपर्ट्स के लिए स्टडी का विषय बना है।

आज पूरे विश्व में इस तरह के विराट आयोजन की कोई दूसरी तुलना नहीं है, ऐसा कोई दूसरा उदाहरण भी नहीं है।

आज अपनी विरासत पर गौरव करने वाला भारत अब एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। ये युग परिवर्तन की वो आहट है, जो देश का नया भविष्य लिखने जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘जब मैं काशी चुनाव के लिए गया था तो मेरे अंतरमन के भाव शब्दों में प्रकट हुए थे और मैंने कहा था- मां गंगा ने मुझे बुलाया है।

इसमें एक दायित्व बोध भी था, हमारी मां स्वरूपा नदियों की पवित्रता को लेकर, स्वच्छता को लेकर। प्रयागराज में भी गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम पर मेरा ये संकल्प और दृढ़ हुआ है।

गंगा जी, यमुना जी, हमारी नदियों की स्वच्छता हमारी जीवन यात्रा से जुड़ी है. हमारी जिम्मेदारी बनती है कि नदी चाहे छोटी हो या बड़ी, हर नदी को जीवनदायिनी मां का प्रतिरूप मानते हुए हम अपने यहां सुविधा के अनुसार, नदी उत्सव जरूर मनाएं।

ये एकता का महाकुंभ हमें इस बात की प्रेरणा देकर गया है कि हम अपनी नदियों को निरंतर स्वच्छ रखें, इस अभियान को निरंतर मजबूत करते रहें।

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