राजधानी भोपाल के ऐशबाग इलाके में पहले से ही 90-डिग्री वाला अधूरा फ्लाईओवर सिस्टम की नाकामी का गवाह बना खड़ा है। अब इसी फेहरिस्त में एक और नया मामला जुड़ गया है।
यहां नगर निगम ने लाखों रुपये खर्च कर एक सार्वजनिक शौचालय बनवाया, लेकिन अब वह किसी काम का नहीं रहा। वजह यह है कि रेलवे ने अपनी जमीन को सुरक्षित करने के लिए शौचालय के ठीक आगे एक ऊंची दीवार खड़ी कर दी है, जिससे इसके अंदर जाने का रास्ता ही खत्म हो गया।
स्थानीय व्यापारियों और रहवासियों ने बताया कि जहां यह शौचालय बनाया गया है, वहां पहले कचरे का ढेर लगा रहता था। BMC ने सफाई के मकसद से यहां शौचालय बनाना शुरू किया।
लोगों ने शुरुआत में ही अफसरों को आगाह किया था कि यह जमीन रेलवे की है और बेहतर होगा कि पास ही निगम की अपनी खाली जमीन (पुराने वाटर टैंक के पास) पर इसे बनाया जाए। लेकिन, अधिकारियों ने लोगों की बात को अनसुना कर दिया और निर्माण कार्य जारी रखा।
पिछले दो हफ्तों के भीतर रेलवे ने अपनी सीमा तय करते हुए वहां पक्की दीवार खड़ी कर दी। नतीजा यह हुआ कि नया बना शौचालय अब रेलवे परिसर के अंदर एक बंद डिब्बे की तरह फंसा हुआ है।
यह जनता के पैसे की सीधी बर्बादी है। जब जमीन हमारी थी ही नहीं, तो वहां निर्माण क्यों कराया गया? अब न तो यहां कोई जा सकता है और न ही इसका कोई उपयोग है। आखिर इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है?
इस पूरे विवाद पर वार्ड 40 की पार्षद मसर्रत और BMC के कार्यपालन यंत्री ए.के. साहनी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। वहीं, अधीक्षण यंत्री आर.आर. जरोलिया ने बस इतना कहा कि वे शहर से बाहर हैं और वापस आकर मामले की जांच करेंगे।
ऐशबाग के लिए यह कोई नई बात नहीं है। यहां का फ्लाईओवर पहले से ही गलत प्लानिंग की भेंट चढ़ा हुआ है। अब यह शौचालय भी उसी कड़ी का हिस्सा बन गया है। बिना किसी दूरदर्शिता के शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट ने यह साबित कर दिया है कि अफसर जनता के टैक्स के पैसे को लेकर कितने लापरवाह हैं।



