मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने साईंनाथ शिक्षण संस्थानों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में सुनवाई करते हुए बोर्ड को अलग से यूजर आईडी और पासवर्ड जारी करने का निर्देश देने से इन्कार कर दिया।
हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों कॉलेजों के पात्र छात्रों को आगामी डीएलएड परीक्षाओं में शामिल होने से रोका नहीं जाएगा और उनके परीक्षा फार्म समय पर भरे जाएं।
न्यायमूर्ति अमित सेठ की एकलपीठ ने मुरैना स्थित श्रीसाईं नाथ शिक्षा महाविद्यालय की प्राचार्य होने का दावा करने वाली भारती शुक्ला और ग्वालियर के रामनगर पुरासानी स्थित श्रीसाईंनाथ शिक्षा महाविद्यालय के प्राचार्य होने का दावा करने वाले मुनेंद्र सिंह तोमर द्वारा दायर याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया।
दोनों याचिकाओं में माध्यमिक शिक्षा मंडल से संस्थान के लिए अलग यूजर आईडी और पासवर्ड जारी करने की मांग की गई थी, ताकि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के डीएलएड द्वितीय वर्ष के परीक्षा फार्म भरे जा सकें।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बोर्ड ने उनके संस्थानों का यूजर आईडी और पासवर्ड बदल दिया है, जबकि प्राचार्य पद से हटाने की कार्रवाई नियमों के अनुसार नहीं की गई।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जितेंद्र शर्मा ने दलील दी कि पहले वर्ष के मामले में खंडपीठ ने छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी थी। इसके बावजूद कई छात्रों के परिणाम घोषित नहीं किए गए थे और अब परीक्षा फार्म भरने में भी बाधा आ रही है।
वहीं बोर्ड की ओर से अधिवक्ता गौरव मिश्रा ने अदालत को बताया कि दोनों संस्थानों में प्रबंधन को लेकर सोसाइटी के दो गुटों के बीच विवाद चल रहा है। संस्थानों के लिए पहले से जारी यूजर आइडी और पासवर्ड के माध्यम से सभी पात्र छात्रों के परीक्षा फार्म भरे जा सकते हैं और यदि छात्र पात्र होंगे तो उनके फार्म अस्वीकार नहीं किए जाएंगे।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि पूर्व में पारित आदेशों में कहीं भी अलग यूजर आइडी और पासवर्ड जारी करने का निर्देश नहीं दिया गया है। साथ ही पहले के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि वर्तमान में जो भी कॉलेज का प्राचार्य होगा, वही संस्थान के यूजर आइडी और पासवर्ड का उपयोग करेगा।
हालांकि अदालत ने यह निर्देश दिया कि दोनों कॉलेजों के सभी पात्र छात्र, चाहे उनका प्रवेश किसी भी पक्ष द्वारा कराया गया हो, उन्हें आगामी परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए। साथ ही संबंधित पक्षों को निर्देश दिया गया कि वे संस्थान के मौजूदा यूजर आइडी और पासवर्ड के माध्यम से छात्रों के परीक्षा फार्म तुरंत भरवाएं।
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि इस संबंध में सूचना कॉलेज के नोटिस बोर्ड सहित अन्य माध्यमों से 10 मार्च तक छात्रों तक पहुंचाई जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि छात्रों के फार्म भरने में किसी प्रकार की लापरवाही या असहयोग किया गया तो संबंधित व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा।



