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सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी

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मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी है। विभाग ने निर्णय लिया है कि अब शिक्षक भर्ती के लिए दो अलग-अलग परीक्षाएं नहीं बल्कि एक परीक्षा होगी।

वह भी राज्य पात्रता परीक्षा होगी, जो अब देश भर में शिक्षक भर्ती के लिए अनिवार्य हो चली है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस बदलाव से जुड़ा विस्तृत प्रस्ताव मप्र कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) को भेजा जा रहा है।

अब तक उच्च माध्यमिक, माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए पहले पात्रता परीक्षा आयोजित की जाती थी। इसमें सफल होने वाले अभ्यर्थी केवल आने वाली भर्ती परीक्षाओं में आवेदन की पात्रता अर्जित करते थे। भर्ती के लिए उनको एक चयन परीक्षा देनी पड़ती थी। इस प्रक्रिया के कारण लोगों को दो बार आवेदन करना पड़ता था और दो अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी भी करनी पड़ती थी।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान हो जाएगी। शिक्षक बनने के इच्छुक लोगों को केवल शिक्षक पात्रता परीक्षा देनी होगी। दो बार परीक्षा होने के कारण अभ्यर्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को पात्रता परीक्षा के लिए 500 रुपये और चयन परीक्षा के लिए फिर से 500 रुपये शुल्क देना पड़ता था। पात्रता परीक्षा में लगभग पांच से छह लाख अभ्यर्थी शामिल होते हैं।

2011 में अनिवार्य हुई थी पात्रता परीक्षा

शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद 2011 में शिक्षकों की भर्ती के लिए पात्रता परीक्षा को अनिवार्य घोषित किया गया। उसके बाद राज्य सरकार ने 2013 और 2018 में भर्ती परीक्षा के नाम से एक ही परीक्षा कराई। बाद में उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती-2023 और प्राथमिक शिक्षक भर्ती-2024 में विभाग पात्रता परीक्षा के बाद भर्ती परीक्षा का आयोजन कराने लगा।

आजीवन वैध रहेंगे पात्रता परीक्षा के अंक

ईएसबी के अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था में केवल पात्रता परीक्षा आयोजित की जाएगी। उसी के स्कोर के आधार पर स्कूल शिक्षा विभाग भर्ती करेगा। यह स्कोर आजीवन वैध रहेगा। हालांकि अभ्यर्थियों को अपने स्कोर में सुधार करने के लिए भविष्य में दोबारा परीक्षा में शामिल होने का अवसर भी मिल सकेगा।

पात्रता परीक्षा से ही चयन सूची बनाने का प्रस्ताव बनाया जा रहा है। परीक्षा के अंक आजीवन वैध रहेंगे, अभ्यर्थी चाहें तो अपने स्कोर में सुधार के लिए दोबारा परीक्षा दे सकते हैं।- डा. संजय गोयल, सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग

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