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इंदौर में दूषित पानी से 16 वीं मौत, क्षितिज सिंघल बने नगर निगम कमिश्नर

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मध्यप्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यही नहीं, सैकड़ों लोग अभी भी प्रभावित हैं। वहीं तीन दर्जन से ज्यादा पीड़ित आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। दरअसल, इंदौर में दूषित पानी पीने से मृतकों की संख्या 16 हो गई है। अब हीरालाल (65) की मौत की जानकारी सामने आई है।

इस मामले को लेकर भोपाल से लेकर इंदौर तक हड़कंप मच गया है। इधर, मौतों के मामले में राज्य सरकार ने नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को हटा दिया। आईएएस क्षितिज सिंघल को इंदौर नगर निगम का नया आयुक्त नियुक्त किया है। वहीं, अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को सस्पेंड कर दिया गया है।

नए निगम आयुक्त क्षीतिज सिंघल को एक तेजतर्रार आईएएस के रूप में जाना जाता है। उनकी पत्नी शीतला पटले भी आईएएस हैं और वर्तमान में सिवनी की कलेक्टर के रूप में पदस्थ हैं। सिंघल इससे पहले उज्जैन नगर निगम के साथ-साथ बिजली कंपनी में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

इंदौर नगर निगम में कमिश्नर के अलावा तीन नए आईएएस अफसर नियुक्त किए गए हैं। खरगोन जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश सिंह, अलीराजपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर सिंह और इंदौर उप परिवहन आयुक्त आशीष कुमार पाठक को निगम में अपर आयुक्त बनाया गया है।

इंदौर नगर निगम में अब तक जितने आयुक्त पदस्थ रहे हैं उसमें पूर्व आयुक्त दिलीप कुमार यादव का कार्यकाल सबसे छोटा रहा। उनकी पदस्थापना 9 सितंबर को की गई थी। इस हिसाब से मात्र 4 महीने ही वह नगर निगम के आयुक्त रहे हैं।

इधर,  दूषित पानी से जुड़ी 16 मौतों को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा- इस पूरे मामले में वहां के महापौर, पार्षदों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी गंभीर सवालों के घेरे में है और उनका आचरण निंदनीय है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

सीएजी ने 6 साल पहले चेताया था

इधर, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- इंदौर और भोपाल में गंदे पानी की सप्लाई को लेकर सीएजी ने 2019 में ही गंभीर चेतावनी दी थी, लेकिन सरकार ने न रिपोर्ट को गंभीरता से लिया और न ही सुधार किए। गंदे पानी की वजह से जानें जाना किसी हादसे का नतीजा नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा – सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर में केवल 4 जोन और भोपाल में सिर्फ 5 जोन में रोज पानी की सप्लाई हो रही थी। दोनों शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से महज 5.30 लाख को ही नल कनेक्शन मिल सके।

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