मध्यप्रदेश में किसानों की माली हालत सुधारने और अन्न उत्पादन में वृद्धि के लिए कई कवायदें की जा रहीं हैं। इसके अंतर्गत खेती के लिए खाद बीज की सहज उपलब्धता के साथ सिंचाई पर भी फोकस किया जा रहा है।
इसी दिशा में राज्य सरकार ने एक और कदम आगे बढ़ाते हुए बड़ी पहल की है। प्रदेश में 52 हजार किसानों के खेत में सोलर पंप स्थापित करने की योजना शुरु की गई है। इससे जहां बिजली बिल के पैसे बचेंगे वहीं किसान अतिरिक्त बिजली बेच भी सकेंगे।
इस प्रकार किसान अन्नदाता के साथ ही ऊर्जा प्रदाता भी बनेंगे। सोलर पंप के लिए किसानों को केवल 10 प्रतिशत राशि देनी होगी। अंशदान में करीब 60 प्रतिशत हिस्सा कृषक ऋण राशि के रूप में मिलेगा जिसका ब्याज भी राज्य सरकार भरेगी। खास बात यह है कि योजना के लिए प्रदेश के 33 हजार से ज्यादा किसानों के लिए कार्यादेश जारी कर दिए गए हैं।
मध्यप्रदेश में किसानों के लिए चलाई जा रही अनेक कल्याणकारी योजना में खेतों में सोलर पंप लगाने की अभिनव पहल भी शामिल है। सीएम डॉ. मोहन यादव का कहना है कि इससे किसानों को बिजली की झंझटों से मुक्ति मिलेगी, उन्हें बिजली बिल का भुगतान भी नहीं करना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त सोलर पम्प से उत्पादित अतिरिक्त उर्जा को किसान सरकार को बेच कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे।
प्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा किसानों को सोलर प्रोजेक्ट लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि सोलर पंप योजना के तहत 34 हजार 600 इकाइयों को लेटर ऑफ अवार्ड जारी कर दिया गया है। इतना ही नहीं, 33 हजार किसानों के कार्यादेश भी जारी किए जा चुके हैं।
केन्द्र सरकार की प्रधानमंत्री कुसुम (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) योजना को एमपी में “प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना” के नाम से संचालित किया जा रहा है। इसमें (कुसुम-ब) किसानों के खेतों में ऑफ ग्रिड सोलर पम्पों की स्थापना की जाती है। योजना में किसानों को 1 एचपी से 7.5 एचपी क्षमता तक के पंप पर 90 प्रतिशत सब्सिडी (अनुदान) दिए जाने का प्रावधान है।
सोलर पंप योजना में सोलर पंप की बेंचमार्क लागत का 30 प्रतिशत अनुदान भारत सरकार द्वारा दिया जाएगा। सोलर पंप की वास्तविक लागत का करीब 10 प्रतिशत कृषक अंशदान व करीब 60 प्रतिशत हिस्सा कृषक ऋण राशि के रूप में लिया जाने का प्रावधान किया गया है। इसका ब्याज सहित भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। सभी वर्गों के किसानों को एक समान सब्सिडी (अनुदान) दिया जाएगा।



