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उन्नाव रेप पीड़िता बोली, वह मुझे फूलन देवी बनने पर मजबूर कर देगा

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निष्कासित भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित होने के बाद उठे उबाल के बीच दुष्कर्म पीड़िता का फिर से एक बयान सामने आया है। उसने कहा कि जैसे निर्भया केस में फांसी हुई है, वैसे सेंगर के साथ भी हो। इस फैसले ने देश की बेटियों को डरा दिया है। अब लग रहा है कि हमें, परिवार को या बच्चों को मार दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जब तक जान है, मैं इस लड़ाई को लड़ूंगी। कोई मार दे तो अलग है, पर मैं खुदकुशी करने वाली नहीं हूं। मैं, अपने परिवार व बच्चों के लिए जिऊंगी और अंतिम सांस तक सेंगर से लडूंगी। सेंगर मुझे फूलन देवी बनने पर मजबूर कर देगा।

माखी कांड की दुष्कर्म पीड़िता ने अपने बयान में यह भी कहा कि 2027 का चुनाव आ रहा है। मुझे पता चला है कि सेंगर अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाना चाह रहा है। उसके रिश्तेदार भी बाहुबली हैं। ऐसे परिवार को भाजपा से टिकट दी जाती है तो मेरे साथ घोर अन्याय होगा। मेरे पिता को पीटा गया।

मारपीट करने वालों पर कार्रवाई की जगह उल्टे पुलिस ने पिता को ही मारपीट का दोषी ठहरा जेल में डाल दिया। बाद में उनकी हत्या करा दी गई। इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरे खाईं।

आखिरकार सत्य की जीत हुई और सेंगर को जेल जाना पड़ गया। जेल जाने के बाद से उसके रिश्तेदार व समर्थक उसे बाहर निकालने की जोर-जुगत लगा रहे थे। वह अपनी साजिश में कामयाब भी हो गए।

यही वजह है कि कुलदीप की सजा निलंबित कर दी गई। मेरा एक बच्चा एक साल का, दो साल का व एक बच्ची है। कुलदीप मेरी हिम्मत तोड़ने के लिए मेरे बच्चों को निशाना बना सकता है।

दुष्कर्म पीड़िता ने कहा मैं खुलकर नाम ले रही हूं कि कुलदीप सेंगर को भाजपा के पूर्व सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह बचा रहे हैं। सीआरपीएफ के जवान बलिदान हो रहे हैं, मारे जाते हैं। मेरे साथ तो सीआरपीएफ के महज पांच लोग चलते हैं। सेंगर व उनके लिए यह सुरक्षा कुछ नहीं। मरवाना होगा तो वह मेरी गाड़ी ही उड़वा देंगे। सेंगर व उनके लोग बहुत पावरफुल हैं।

पीड़िता के इस बयान पर भाजपा के पूर्व सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह ने कटाक्ष किया है। कहा कि गंभीर आरोप लगने पर न्यायपालिका ने ही कुलदीप को सजा दी थी। अब उसी न्यायपालिका ने समीक्षा की और सजा निलंबित कर दी।

खुद को पीड़िता बताने वाली की सोच चित्त भी मेरी पट भी मेरी है। वह सोंचती है कि कुलदीप को फांसी दे दी जाए। आखिर किस नैतिकता की बात की जा रही है।

देश नैतिकता व भावनाओं से नहीं, कानून से चलता है। इसलिए धरना प्रदर्शन व नाटक नहीं होना चाहिए। न्यायपालिका के आदेश का सम्मान होना चाहिए। आप सुप्रीम कोर्ट जाइए। नाटक से देश नहीं चलता है।

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